फ़ोन से अफ़वाह फैलाने वाले पर मुक़दमा

वहीदुद्दीन
Image caption आरोप साबित हो जाने पर वहीदुद्दीन को दो लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है

जयपुर पुलिस ने बम की अफ़वाह फैलाने वाले वहीदुद्दीन के ख़िलाफ़ हर्जाने के लिए एक स्थानीय अदालत में मुक़दमा दायर किया है.

अगर पुलिस अदालत में अपना दावा साबित कर देती है तो वहीदुद्दीन को दो लाख रुपए का जुर्माना देना पड़ेगा.

पुलिस ने कहा है की बम की अफ़वाह फैलाने वालों को अब समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम में बंद कर दिया जाएगा.

पुलिस ने यह कदम तब उठाया जब राज्य में बम या विस्फोटक की अफ़वाह फैलाने की घटनाएँ बढ़ने लगीं.

नुक़सान की भरपाई

पिछले छह महीने में ऐसे 11 मामले सामने आए हैं जब पुलिस को अनाम फ़ोन मिले. इनमें कहा गया की बम धमाके होने वाले हैं. अभी दो जुलाई को ही जयपुर में एक सिनेमा हॉल में बम की अफ़वाह फैलाई गई थी.

पुलिस महानिरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया की अब ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता के अलावा सिविल क़ानून के तहत नुक़सान की भरपाई की भी कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने बताया की अगर फ़ोन करने वाला आपराधिक अतीत वाला है तो उसे राज्य समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण क़ानून के तहत भी निरुद्ध किया जा सकता है.

पुलिस के मुताबिक वहीदुदीन ने अप्रैल में फ़ोन कर बम धमाके करने की धमकी दी थी. पुलिस ने उसकी बताई जगह की जयपुर में तलाशी ली जिसके बाद सूचना अफ़वाह निकली.

पुलिस ने फ़ोन नंबर की मदद से उसे खोज निकाला. पकड़े जाने पर वहीदुद्दीन ने बताया की उसने अपने दामाद को सबक सिखाने किए लिए उसके फ़ोन का इस्तेमाल किया था.

पुलिस महानिरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने बताया की अभी इस पहले मामले में सीमित नुक़सान ही शामिल किया गया है. इसमें लोगो को होने वाले मानसिक नुक़सान को शामिल नहीं किया गया है.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ ऐसी झूठी अफ़वाह फैलाने वाले फ़ोन से बड़ा नुक़सान होता है.

राज्य सरकार ने 2006 में समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण क़ानून बनाया था. इसके तहत समाज विरोधी काम करने वाले को एक साल के जेल की सज़ा हो सकती है.