मामले की जाँच सीबीआई से

  • 10 जुलाई 2009
कारसेवक
Image caption बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के बाद से विवाद बढ़ गया है

उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के विवादास्पद स्थल से संबद्ध 23 लापता फ़ाइलों के मामले की जाँच सीबीआई को सौंपने की सिफ़ारिश की है.

मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी.

इससे पहले राज्य प्रशासन ने इन लापता 23 फ़ाइलों के बारे में लखनऊ के हज़रतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है.

गृह विभाग के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि बृहस्पतिवार शाम को उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार इस बारे में एक एफ़आईआर दाख़िल करा दी गई है.

उच्च न्यायालय ने पिछले कई सालों से ग़ायब इन फ़ाइलों के बारे में गंभीर रुख़ अपनाते हुए सरकार से इस पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी.

इस सप्ताह के शुरू में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया था कि वह इस मामले की सीबीआई जाँच के भी आदेश दे सकती है.

राज्य प्रशासन ने गृह सचिव आनंद कुमार से इस मामले की जाँच करने को भी कहा है.

उन्हें अपनी रिपोर्ट देने के लिए दस दिन का समय दिया गया है.

समझा जा रहा है कि इस मामले पर अगली सुनवाई अगले हफ़्ते होगी.

छह जून, 2009 की गृह सचिव की रिपोर्ट में कहा गया था कि अयोध्या विवाद से संबंधित 23 फाइलें गृह मंत्रालय के विशेष सेल से ग़ायब हैं.

रिपोर्ट में कहा गया कि ये फाइलें सुभाष भान साध नामक एक अधिकारी के पास थीं जिनका निधन हो चुका है.

इस मामले की सुनवाई कर रही तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने इसे गंभीरता से लिया.

अहम दस्तावेज़

इन दस्तावेज़ों में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ओर से राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत को भेजा गया टेलीग्राम भी शामिल है.

अन्य छह दस्तावेज़ों में राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन के बीच हुआ पत्राचार शामिल है. ये दस्तावेज़ कुछ किताबों में प्रकाशित भी हुए हैं.

इन पत्रों से पता चलता है कि तत्कालीन ज़िलाधिकारी केके नैयर ने विवादित परिसर से मूर्तियाँ हटाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि इससे ख़ून-ख़राबा होगा.

अदालत इस बात पर ज़ोर दे रही है कि राज्य सरकार इन दस्तावेज़ों को खोजकर पेश करे जिससे 60 साल पुराने इस विवाद की शुरुआत का पता चल सके.

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