शोपियाँ में हड़ताल निलंबित

भारत प्रशासित कश्मीर के शोपियाँ ज़िले में 47 दिनों के बंद के बाद जनजीवन पटरी पर लौट रहा है और हड़ताल निलंबित कर दी गई है.

दो महिलाओं की हत्या और बलात्कार के बाद शोपियाँ में करीब डेढ़ महीने से बंद था.

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अपील के बाद हड़ताल निलंबित की गई है. जस्टिस बरीन घोष ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान ये अपील की थी.

मजलिसे-मुशावरत के उपाध्यक्ष मोहम्मद शफ़ी खान ने बीबीसी को बताया कि हड़ताल 23 जुलाई तक निलंबित कर दी गई है जब हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी.

मुख्य न्यायाधीश ने मजसलिसे-मशावरात के प्रतिनिधियों से कहा था कि शोपियाँ के लोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं इसी वजह से जाँच में प्रगति हो पाई है.

उन्होंने कहा कि शोपियाँ के लोगों ने बहुत तकलीफ़ उठाई है और अब उन्हें और तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए. ऐसा शायद पहली बार हुआ है जब न्यायालय की ओर से ऐसी अपील की गई हो.

गिरफ़्तारी

गुरुवार सुबह सरकारी दफतर, दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान खोले गए. यातायात भी सामान्य है.

इस बीच विशेष जाँच दल ने उन चार पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है जिन पर सुबूत मिटाने का आरोप है. हाई कोर्ट के आदेश के बाद ये गिरफ़्तारियाँ की गईं.

अदालत ने आदेश दिया था कि इन अधिकारियों के डीएनए नमूने लिए जाएँ ताकि ये पता लगाया जा सके कि कहीं बलात्कार उन्होंने तो नहीं किया.

खंडपीठ ने कहा कि कोई भी निचली अदालत इनकी ज़मानत की अर्ज़ी पर सुनवाई नहीं करेगी.

दो महिलाओं के बलात्कार और हत्या के मामले ने कश्मीर घाटी में हड़कंप मचा रखा था और जून में आठ दिन तक घाटी में बंद रहा था.

पुलिस और लोगों के बीच झड़पों में दो नागरिक मारे जा चुके हैं और 400 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने शुरु में कहा था कि इन महिलाओं की न तो हत्या हुई है और न ही बलात्कार हुआ. कहा जा रहा है कि उन्हें अधिकारियों ने ग़लत जानकारी दी थी.

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