दुल्हनों की तलाश में राजस्थानी दूल्हे

  • 11 जुलाई 2009
राजस्थान में सामूहिक विवाह
Image caption राजस्थान में कन्या भ्रूण हत्या की समस्या बहुत गंभीर है

राजस्थान में लड़कियों की घटती की संख्या के कारण अब कुंवारे लड़के दुल्हन की तलाश में समाज कल्याण विभाग के महिला सदन के दरवाजे दस्तक देने लगे है.

जयपुर के महिला सदन में रह रही 12 लड़कियों के लिए कोई 60 युवक विवाह के लिए उनका हाथ माँगने आ गए. समाज कल्याण विभाग ने इनमें योग्य वर चुन कर इन लड़कियों की समारोहपूर्वक शादी कर दी और आशीर्वाद समारोह कर विदाई दे दी. महिला संगठनों के मुताबिक जिस तरह से समाज में लड़कियों की संख्या कम हो रही है, हालत और खराब होंगे.

इन लड़कियों का विवाह तो सादगी से हुआ, लेकिन विभाग ने आशीर्वाद समारोह बहुत धूमधाम से आयोजित किया. वहाँ विवाह के मांगलिक गीत गूंजे, गणमान्य लोग वर-वधु को आशीर्वाद देने आए और बाबुल की दुआएँ लेती जा... जैसे गीत के बीच इन बालिकाओं को विदाई दी गई.

सामाजिक अधिकारिता के अतिरिक्त निदेशक एन के खीचा ने बीबीसी को बताया की कुल 63 लोगों ने इन बालिकाओं को जीवन संगिनी बनाने के लिए आवेदन किया था.

खीचा कहते हैं, ''हमने आवेदनों की छंटनी की, फिर हरेक आवेदक की योग्यता, उसकी घर चलाने और बसाने की क्षमता और जीवनसाथी से निर्वाह के संकल्प की जाँच की. फिर योग्य आवेदक के लिए जोड़ी मिलाने का काम किया, तब जाकर रिश्ते को पक्का किया गया."

ट्रेनिंग

महिला सदन उन बालिकाओं का ठिकाना है, जो निराश्रित हैं. विभाग ने इन बालिकाओं को पढ़ाया और सिलाई-कढ़ाई जैसे कामों की ट्रेनिंग इस तरह दी जैसे हर अभिभावक अपनी बेटियों को देते है.

खीचा कहते हैं, "आज हर कोई योग्य लड़कियां चाहता है. हमने इन बच्चियों को संस्कार और शिक्षा दी है. जाहिर है, हर कोई इनका हाथ थामना चाहता था."

खीचा का कहना है कि उस दिन महिला सदन में बालिकाओं के हाथों पर मेहँदी रचाई गई और दुल्हे राजा बारात लेकर आए. सरकार ऐसे हर विवाह के लिए दस हजार रुपये की मदद देती है. मगर बाकी इंतज़ाम समाज के लोग ही करते हैं.

अनेक सामाजिक, धार्मिक संगठन विवाह में शरीक हुए और बालिकाओं को कन्यादान में कुछ न कुछ दिया. एक मुस्लिम संगठन से जुड़े सलीम इंजीनियर कहते हैं, "हमने इन बालिकाओं को अपनी बेटियों की तरह लिया और उपहार दिए. इनमें दो लड़कियां मुस्लिम थीं. मगर सबको सामान रूप से उपहार दिए गए."

जैन समाज के पदंम चंद जैन का कहना है कि दुल्हन को गहने या उपहार देना हमारा फर्ज है. महिला सदन में बारात लेकर आए प्रदीप शर्मा कहते हैं कि वो अपनी जीवन संगिनी यहाँ पाकर बहुत खुश हैं. इन लड़कियों को अपना घर बसने का पूरा हक़ है.

दुल्हन बन कर राखी भी बेहद खुश थीं. कहने लगीं कि उसे यहाँ शादी में माता-पिता की कमी महसूस नहीं होने दी गई. उनका कहना है कि महिला सदन से रिश्ता टूट नहीं सकता.

महिला कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव कहती हैं, "राजस्थान में लड़कियों की संख्या बहुत तेज़ी से कम हो रही है. अगली जनगणना में बहुत चिंताजनक तस्वीर उभरने वाली है."

पिछली जनगणना में 1,000 मर्दों की तुलना में महिलाओं की संख्या 922 थी, तब से हालात और बिगड़े हैं. राज्य के कई हिस्सों में महिला-पुरुष अनुपात चिंताजनक स्तर पर पहुँच गया है और लोग विवाहयोग्य लड़कियां ढूंढने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने लगे हैं. लेकिन ये संतुलन तो तभी सलामत रह सकेगा जब कोख से निकली कन्या महफूज़ रहे.

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