सब्बरवाल मामले में छह अभियुक्त बरी

  • 13 जुलाई 2009
भारतीय पुलिस (फ़ाइल)
Image caption अदालत के सामने मामले के गवाह तीन पुलिसकर्मियों ने भी अपने बयान बदल दिए

नागपुर की एक अदालत ने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर सब्बरवाल हत्याकांड मामले में अभियुक्त ठहराए गए छह लोगों को सोमवार को आरोप मुक्त करार देते हुए बरी कर दिया है.

अदालत ने कहा है कि अभियुक्त करार दिए गए लोगों के ख़िलाफ़ अदालत के समक्ष जो सबूत पेश किए गए वो पर्याप्त नहीं थे इसलिए अभियुक्तों को बरी किया जाता है.

ग़ौरतलब है कि अगस्त 2006 में उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के माधव कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव रद्द हो जाने से नाराज़ छात्रों ने कई शिक्षकों से मारपीट की थी. इसी मारपीट में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर सब्बरवाल की मौत हो गई थी.

प्रोफ़ेसर सब्बरवाल के परिवारजनों का कहना था कि उनपर हमला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने किया था और वही उनकी हत्या के लिए ज़िम्मेदार हैं.

प्रोफ़ेसर सब्बरवाल के बेटे हिमांशु सब्बरवाल ने आशंका जताई थी कि चूंकि अभियुक्त मध्यप्रदेश में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी से संबंधित संगठनों के सदस्य हैं इसलिए वहाँ निष्पक्ष जाँच और सुनवाई संभव नहीं है. हिमांशु सब्बरवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके अनुरोध किया था कि मामले की सुनवाई दिल्ली में हो और पूरे मामले की नए सिरे से सीबीआई जाँच कराई जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पूरी बात तो नहीं स्वीकारी पर इस मामले को राज्य से बाहर, पुणे की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया ताकि राज्य सरकार के दबाव की स्थितियां पैदा न हो.

'दुर्भाग्यपूर्ण फैसला'

नागपुर की अदालत ने सोमवार को जब इस मामले में अभियुक्त ठहराए गए छह लोगों को बरी करने के आदेश दिए तो प्रोफ़ेसर सब्बरवाल के परिवार ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण फैसला बताया और कहा कि ऐसा राज्य सरकार की ओर से लापरवाही और ग़ैरज़िम्मेदाराना रवैये के चलते हुआ है.

दरअसल, मामले की पैरवी के लिए वकील तो महाराष्ट्र की ओर से दे दिया गया था पर सबूत देने का काम राज्य सरकार को ही करना था. इस मामले में एक एक करके सभी सबूत कमज़ोर साबित होते गए और आखिरकार अभियुक्त बरी हो गए.

अदालत ने मामले से संबंधित वीडियो को नकार दिया. इसके बाद अदालत के सामने सभी चश्मदीद गवाह, जिनमें तीन पुलिसकर्मी भी शामिल थे, एक एक करके अपने बयान से मुकरते गए.

इस तरह अदालत में सब्बरवाल परिवार का पक्ष कमज़ोर पड़ता चला गया. अब उनका कहना है कि वो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे ताकि न्याय मिल सके.

हालाँकि अब लोगों की नज़र राज्य सरकार के रुख़ पर है क्योंकि मामले के सरकारी वकील ने कहा कि वो फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट जाएंगे पर इसके लिए राज्य सरकार की रज़ामंदी भी ज़रूरी होगी.

संबंधित समाचार