'दोषियों को बचा रही है पुलिस'

भारत प्रशासित कश्मीर के शोपियां ज़िले में दो महिलाओं के साथ बलात्कार के बाद हत्या के मामले की जाँच करने वाले एक सदस्यीय आयोग के प्रमुख जस्टिस मुज़फ़्फ़र जान ने पुलिस पर दोषियों को बचाने का आरोप लगाया है.

Image caption शोपियां में कई दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं

उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस मारी गई महिलाओं के परिजनों को बदनाम भी कर रही है.

जस्टिस जान ने बताया कि उनकी रिपोर्ट में कहा गया है कि बलात्कार और हत्या के मामले में पुलिस के शामिल होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं.

लेकिन जस्टिस जान की रिपोर्ट के एक हिस्से के लिए उनकी आलोचना भी हो रही है. इस हिस्से में कहा गया है कि दो महिलाओं के रिश्तेदार भी हत्या में शामिल हो सकते हैं.

इसमें मारी गई महिलाओं में से एक नीलोफ़र जान के विवाहेतर संबंध की संभावना भी जताई गई है और कहा गया है कि हो सकता है कि बलात्कार और हत्या की साज़िश में उसका पति शकील अहमद भी शामिल हो.

मारी गई दूसरी महिला आयशा शकील की बहन थी. रिपोर्ट के इस हिस्से में इसकी भी आशंका जताई गई है कि हो सकता है कि नीलोफ़र का अपना भाई ज़ीराक इसमें शामिल हो क्योंकि वह शकील के साथ अपने बहन के रिश्ते से ख़ुश नहीं था.

आलोचना

शोपियां में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे मजलिस-ए-मुशावरात ने जस्टिस जान पर मारी गई महिलाओं और उनके परिजनों के चरित्रहनन का आरोप लगाया है.

लेकिन जस्टिस जान ने बीबीसी को बताया कि रिपोर्ट के जिस हिस्से पर सवाल उठ रहे हैं, दरअसल वह पुलिस अधीक्षक हसीब द्राबू ने लिखी है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग ने पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की थी और न ही आयोग की रिपोर्ट इस पर आधारित है.

जस्टिस जान ने कहा कि पहले दिन से ही पुलिस इस मामले में पक्षपात कर रही थी. जबकि हमारा प्रयास सच्चाई सामने लाना था.

उन्होंने कहा, "हो सकता है कि इसी कारण उन्होंने पीड़ित परिवार वालों के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया हो लेकिन हमने इसे स्वीकार नहीं किया."

जस्टिस जान ने बताया कि क़ानूनी ज़रूरत के मुताबिक़ ही पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट को उनकी रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया.

इस बीच मजलिस-ए-मुशावरात ने कहा है कि शोपियां ज़िले में बंद तब तक जारी रहेगा, जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिल जाती. पिछले 40 दिनों से शोपियां में बंद चल रहा है.

30 मई को इन दोनों महिलाओं के शव मिलने के बाद कश्मीर में काफ़ी हंगामा हुआ था.

पुलिस ने शुरू में इसे दुर्घटना कहा था. लेकिन बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने बलात्कार के बाद इन महिलाओं की हत्या कर दी. फ़ॉरैंसिक टेस्ट में भी बलात्कार की पुष्टि हुई जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया.

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