माया नाराज़ तो सोनिया आहत

मायावती

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के बारे में कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी की कथित टिप्पणी और उसके बाद का घटनाक्रम गुरुवार को दिनभर चर्चा और विवाद का विषय बना रहा.

रीता बहुगुणा जोशी को गुरुवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उनकी ज़मानत की अर्ज़ी निचली अदालत में खारिज कर दी गई. कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि प्राथमिकी अभी तक सही ढंग से दर्ज नहीं है और न ही कोई हमलावर पकड़ा गया है.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि उनका प्रशासन पूरे मामले की छानबीन कर रहा है. निष्पक्ष जाँच करने के आदेश दिए जा चुके हैं. मामला दर्ज हो चुका है. साथ ही एक पलटवार किया कि दलित विरोधी और आपत्तिजनक बयान पर कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी अभी तक चुप क्यों हैं.

शाम होते होते कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने सोनिया गांधी की टिप्पणी की जानकारी पत्रकारों को दे दी. कहा, सोनिया गांधी इसे पूरे प्रकरण से बहुत आहत हैं पर बसपा के कार्यकर्ताओं के रवैये को ग़लत मानती हैं.

संसद के दोनों सदनों में बसपा और कांग्रेस के सांसदों ने अपने अपने स्वरों में यह मुद्दा उठाया. कुछ अन्य दलों के लोग अपनी अपनी राय भी पूरे घटनाक्रम पर रखते रहे. दोनों सदनों को हंगामे के कारण स्थगित भी करना पड़ा.

विवाद की शुरुआत...

दरअसल, विवाद की शुरुआत हुई बुधवार को. कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्ष रीता बहुगुणा ने बुधवार को एक रैली में कथित रूप से मायावती के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था. इस बयान में कथित तौर पर मायावती को नाराज़ करने लायक पर्याप्त शब्द थे. मुख्यमंत्री नाराज़ हुईं. उन्होंने दलित समाज की एक महिला और राज्य की मुख्यमंत्री के अपमान का आरोप लगाते हुए रीता बहुगुणा पर कार्रवाई के आदेश दिए.

बुधवार की रात ही रीता बहुगुणा जोशी को ग़ाज़ियाबाद से गिरफ़्तार किया गया. गिरफ़्तारी के बाद उन्हें मुरादाबाद भेज दिया गया. उनके ख़िलाफ़ एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं.

गिरफ़्तारी के बाद देर रात को लखनऊ स्थित रीता जोशी के आवास को निशाना बनाया गया. कुछ लोगों ने उनके घर को आग लगा दी और तोड़- फोड़ की. कांग्रेस का आरोप है कि तोड़ फोड़ बसपा के कार्यकर्ताओं ने की.

गुरुवार को इस कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में रीता बहुगुणा जोशी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

हालांकि गुरुवार को मायावती ने अपने बयान में इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि उनकी पार्टी के लोगों को शक है कि ऐसा कांग्रेस के ही लोगों ने किया है ताकि रीता बहुगुणा के बयान से मीडिया और लोगों का ध्यान हटाया जा सके.

रीता पर निशाना

मायावती जब गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करने पहुँची तो उनके पास प्रेस बयान के अलावा एक किताब भी थी. किताब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हेमवती नंदन बहुगुणा पर थी. रीता बहुगुणा जोशी हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी हैं और यह पुस्तक उन्हीं की लिखी हुई है.

मायावती ने यह पुस्तक दिखाते हुए कहा कि इस किताब में गांधी परिवार के बारे में जिस तरह की भाषा का प्रयोग रीता बहुगुणा ने किया है वो आपत्तिजनक है पर कांग्रेस इसे अनदेखा करती आ रही है.

उन्होंने कहा, "देश के सभी राज्यों में बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता इस टिप्पणी को सुनने के बाद भड़के हुए थे पर मैंने उन्हें तुरंत संदेश भेजा कि न तो सड़कों पर उतरें, न तोड़ फोड़ करें और न ही धरना प्रदर्शन करें. रीता बहुगुणा के घर पर जो घटना हुई वो दुर्भाग्यपूर्ण है पर इससे बसपा को जोड़ना कतई ठीक नहीं है."

मायावती ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही प्राथमिकी दर्ज कर ली गई और पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच के आदेश दिए जा चुके हैं.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "रीता बहुगुणा के घर पर हुए हमले के संदर्भ में मेरी पार्टी के लोगों को शक है कि ऐसा कांग्रेस के लोगों ने किया है ताकि रीता बहुगुणा के इस आपत्तिजनक और अभद्र बयान से मीडिया और लोगों का ध्यान हटाया जा सके."

उन्होंने यह भी कहा कि बलात्कार और हत्या की शिकार बनी दलित महिलाओं को मुआवज़े के मामले में जो बात कांग्रेस पार्टी की रीता बहुगुणा रैली में कह रही थीं दरअसल, उस प्रावधान को बनाने और क़ानून को लाने का काम कांग्रेस ने ही किया था.

उन्होंने कहा, "बलात्कार और उसके बाद कुछ मामलों में हत्या का शिकार होने वाली दलित महिलाओं के सम्मान और जीवन की क़ीमत केंद्र की कांग्रेस सरकार ने तय की है. बसपा इससे सहमत नहीं है. केवल पैसे की बात ही ग़लत है. बसपा अगर केंद्र में प्रभावी होती है तो इस मामले में आजीवन कारावास और फांसी की सज़ा जैसे प्रावधान किए जाएंगे. और ऐसा केवल दलित महिलाओं नहीं, बल्कि सर्वसमाज की महिलाओं के लिए किया जाएगा."

राजनीति गरमाई

Image caption रीता बहुगुणा उत्तर प्रदेश की राज्य कांग्रेस इकाई की अध्यक्ष हैं.

रीता बहुगुणा जोशी की इस कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद राज्य और केंद्र के सियासी हलकों में खासी हलचल मची हुई है.

लखनऊ से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने बताया कि मायावती के बयान के कुछ ही देर बाद लखनऊ में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता रामनरेश यादव ने पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई और इसके बाद पत्रकारों को बताया कि राज्य सरकार के रवैये के ख़िलाफ़ शुक्रवार से पार्टी आंदोलन शुरू करने जा रही है.

रामनरेश यादव ने बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता शुक्रवार से रीता बहुगुणा की गिरफ़्तारी और उनके घर पर हुए हमले के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन शुरू कर रहे हैं.

उन्होंने रीता बहुगुणा के घर पर हुए हमले को प्रायोजित बताया और कहा कि यह लोकतंत्र के लिए दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. इस दौरान राज्य के बनारस, लखनऊ, फ़ैज़ाबाद और बस्ती ज़िलों से राज्य सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन की ख़बरें आ रही हैं.

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