प्रधानमंत्री आश्वस्त, विपक्ष का वॉकआउट

  • 17 जुलाई 2009
मुंबई हमला
Image caption विपक्ष का कहना है कि पाकिस्तान से बातचीत में आतंकवाद को बाहर रखना ग़लत फैसला है

भारत पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की ओर से मिस्र में बातचीत के बाद आए संयुक्त बयान को लेकर दिल्ली में राजनीतिक गरमाहट बढ़ गई है. विपक्ष ने इस बयान की निंदा करते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया है.

गुरुवार को मिस्र में निर्गुट देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बीच बातचीत हुई थी. दोनों नेताओं ने इसके बाद एक संयुक्त बयान भी जारी किया था.

भारतीय समयानुसार गुरुवार शाम जारी हुए इस संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई का असर दोनों देशों के बीच समग्र वार्ता प्रक्रिया पर नहीं पड़ना चाहिए.

कुछ लोगों का मानना है कि मुंबई पर पिछले वर्ष नवंबर में हुए हमले की घटना को अब बातचीत के सिलसिले से बाहर रखने जैसा संकेत इन नेताओं का संयुक्त बयान देता है.

बयान की इसी बात पर विपक्ष ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को घेरना शुरू कर दिया है.

सदन में बोलते हुए विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि संयुक्त बयान से साफ़ है कि पाकिस्तान की आतंकवाद के मुद्दे को बातचीत से बाहर रखने की मांग भारत सरकार ने मान ली है. उन्होंने कहा कि विपक्ष इसका पुरज़ोर विरोध करता है.

प्रधानमंत्री का बयान

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को सदन में कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से आतंकवाद के मुद्दे पर और ख़ासकर मुंबई हमलों को लेकर गंभीरता और मज़बूती से अपना पक्ष रखा है.

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुंबई हमलों की जाँच में मदद की बात कही है और साथ ही आतंकवाद से कड़ाई से निपटने की भी. आतंकवाद को ख़त्म करने पर पाकिस्तान में राजनीतिक मंशा भी बनती नज़र आ रही है. पाकिस्तान ने स्वीकारा है कि ऐसा उनके अपने हित में भी है. हम पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं और मैं मानता हूं कि इन क़दमों से आगे चलकर भारत का हित सधेगा."

पर विपक्ष ने प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जब आतंकवाद और बातचीत को अलग करके ही देखना था तो मुंबई के हमलों के बाद अबतक यानी सात महीनों तक इंतज़ार क्यों करते रहे.

विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "मुंबई हमलों के बाद आप लोगों ने ही कहा था कि हम इन स्थितियों में बातचीत जारी नहीं रख सकते. सात महीने बाद आप अपनी बात से पीछे हट गए और समग्र बातचीत की प्रक्रिया पर लौटने का बयान जारी कर दिया. फिर सात महीने तक सरकार इंतज़ार क्यों करती रही. इन सात महीनों में क्या बदल गया है."

इसपर वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने विपक्ष के नेता को जवाब देते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे पर विपक्ष बात करना चाहता है तो इसके लिए एक योजनाबद्ध तरीके से बैठकर बातचीत की जा सकती है.

प्रणब मुखर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विपक्ष ने कहा कि बातचीत तो हो सकती है पर सरकार ने जिस तरह से भारत का पक्ष कमज़ोर किया है, उसके विरोध स्वरूप विपक्ष सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करता है.