मायावती के इस्तीफ़े की माँग

  • 20 जुलाई 2009
रीत बहुगुणा जोशी
Image caption अपने घर को हुए नुकसान को देख रीता जोशी भावुक हो गईं

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का मकान जलाने के आरोपी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता इंतज़ार आब्दी को लाल बहादुर गन्ना किसान संस्थान का अध्यक्ष बनाकर उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया है.

दूसरी ओर रीता जोशी ने नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री सुश्री मायावती के त्यागपत्र की मांग की है और कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री मायावती से अपनी जान को ख़तरा है.

गन्ना संस्थान के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि आब्दी की नियुक्ति का आदेश रविवार को मिला. आब्दी लालबत्ती गाडी में बैठकर घूम रहे हैं.

आब्दी के एक समर्थक कब्बन नवाब ने पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री मायावती ने उन्हें उनके कार्यों के लिए इनाम दिया है.

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता इसे जले पर नमक छिड़कने की संज्ञा दे रहे हैं.

रीता जोशी ने सीधे मुख्यमंत्री सुश्री मायावती पर निशाना साधा है. एक प्रेस कॉंफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हम उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री मायावती जी पर आरोप लगाते हैं कि सचिवालय के बगल में उनके घर के करीब इतना बड़ा तांडव डेढ़ घंटे तक होता रहा और पुलिस खड़ी तमाशबीन बनी रही, तेल देकर आगजनी करवाती रही. नैतिकता के आधार पर तो अब उन्हें इस्तीफा देना चाहिए.''

मंत्री बनाने का विरोध

रीता जोशी ने अग्निकांड मामले के अभियुक्त को राज्यमंत्री का दर्जा देने की निंदा की. उन्होंने आरोप लगाया कि घटना में इस्तेमाल कार बहुजन समाज पार्टी के एक नेता की है जिसने एक मंत्री के घर में शरण ले रखी है.

उन्होंने कहा, "अब आज के बाद मुझे अपनी सुरक्षा को गंभीर ख़तरा है क्योंकि जो मुख्यमंत्री घर पर हमला करवा कर आग लगवा सकती हैं वह मेरे ऊपर भी हमला करवाने में कोई कसर न छोडें लेकिन मैं डरने वाली नही हूँ."

रीता जोशी अपना जला हुआ घर देखने गईं और वहां भावुक होकर रो पडीं. इससे पहले दिल्ली से लखनऊ पहुँचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चारबाग स्टेशन पर उनका ज़ोरदार स्वागत किया.

उनके घर पर पंद्रह जुलाई की रात आग लगाई गई जबकि उन्हें मुरादाबाद में मुख्यमंत्री के बारे में अपमानजनक भाषण देने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था.

अपने विवादास्पद बयान के लिए उन्होंने खेद प्रकट किया मगर मुख्यमंत्री का कहना है कि उनका अपराध माफ़ी योग्य नही है.

अदालत से रीता जोशी को 29 जुलाई तक अंतरिम ज़मानत मिली है और उन्होंने अपने खिलाफ भड़काऊ भाषण और दलित उत्पीड़न के मुक़दमे को ख़ारिज करने की याचिका हाईकोर्ट में दायर की है.

इस बीच राज्य सरकार ने आगजनी की जांच सीआईडी से कराने का आदेश दिया है, पर कांग्रेस पार्टी अड़ी है कि मामले की जांच सीबी आई से कराई जाए.

प्रेस कॉंफ्रेंस में मौजूद कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी ने मायावती को तानाशाह बताया और घोषणा की कि अगर 31 जुलाई तक श्रीमती जोशी के घर पर अग्निकांड की जांच सीबीआई को नही सौंपी गई तो पहली अगस्त से कांग्रेस पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन करेगी.

इस घटना को लेकर मायावती सरकार की काफी किरकिरी हो रही है. कहा जा रहा है कि मायावती सरकार आलोचना को बिलकुल बर्दाश्त नही कर रही और विपक्ष को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है जो अलोकतांत्रिक है.

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