क़ैदियों को अनूठी सुविधा की पहल

पंजाब की जेलों में जल्द ही क़ैदियों के साथ-साथ उनके परिवार वाले भी सरकारी मेहमान बन सकेंगे. लेकिन जेलों में सुधार की एक विशेषज्ञ का कहना है कि ‘राज्य सरकार का ये प्रस्ताव हद से बाहर निकल गया है.

Image caption एक योजना के तेहत पंजाब की जेलों में क़ैदियों को परिवार के साथ रहने का सुख मिल सकेगा

पंजाब सरकार ने क़ैदियों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए ये योजना तैयार की है जिसके तहत लंबे समय से जेल में बंद व्यक्ति ‘एक हफ़्ते के लिए अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रह सकेंगे.’ लेकिन दिलचस्प बात ये है कि ये प्रस्ताव क़ैदियों को पैरोल पर रिहा करने का नहीं बल्कि उनकी पत्नी और बच्चों को जेल में लाकर उनके साथ ही ठहराने का है. पंजाब के जेल और संस्कृति मंत्री हीरा सिंह गाभड़िया के अनुसार राज्य के कपूरथला और फ़रीदकोट जेलों में इसके लिए 96 अपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं.

“हमने भी राजनीतिक आंदोलनों के दौरान एक लंबा समय जेल में गुज़ारा है. इसलिए मुझे मालूम है कि जेल में रहने वालों पर क्या गुज़रती है. जैसे कोई बंदा पीएचडी कर लेता है, हमने भी जेल में रह कर क़ैदियों की सारी समस्याओं को समझने की कोशिश की है.”

हद से बाहर

लेकिन जेलों में सुधार की विशेषज्ञ और देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी कहती हैं, “ये योजना हद पार कर गई है. सरकार ने किस आधार पर ये फ़ैसला किया है, क्या इस बारे में कोई शोध किया गया है? सज़ा का मक़सद ही ये होता है कि किसी व्यक्ति की आज़ादी उससे छीन ली जाए, इसलिए इस प्रकार के क़ैदियों को सामान्य जीवन देने का कोई औचित्य ही नहीं है.”

मंत्री हीरा सिंह का कहना है कि जब बरसों तक मुक़दमों का फ़ैसला नहीं होता या किसी को लंबी सज़ा हो जाती है तो अकेले रहने से क़ैदियों का मानसिक संतुलन बिगड़ने और सहवास से वंचित रहने के कारण उनके समलैंगिक हो जाने और नशे की ओर आकर्षित होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

मनोवैज्ञानिक संदीप वोहरा इस बात से तो सहमत हैं लेकिन उनका कहना है कि क़ैदियों का जीवन स्तर बेहतर बनाने की पहली कोशिश में अपराध के प्रकार को भी नज़र में रखना चाहिए और पहली कोशिश उन्हें बुनियादी सहूलियत मुहैया कराने की होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “जब एक ही लिंग के लोग लंबे समय तक एक ही जगह होते हैं तो ऐसी स्थिति में समलैंगिकता कोई असामान्य बात नहीं है. लेकिन ये कहना मुश्किल है कि हफ़्ते- दस दिन के लिए उनको पत्नी के साथ रहने की इजाज़त देकर इस समस्या पर किस हद तक क़ाबू पाया जा सकता है.”

महिलाओं के लिए भी

वोहरा ने कहा, “मेरे विचार से पेशेवर अपराधियों को ये सहूलियत नहीं दी जानी चाहिए. लेकिन बहुत से लोग हालात का शिकार होकर क़ानून के घेरे में आ जाते हैं, उन्हें ऐसी सुविधा दी जा सकती है.”

लेकिन हीरा सिंह गाभड़िया कहते हैं कि जब मुक़दमे लंबे खिंचते हैं तो अपराधी या अभियुक्त के साथ-साथ उसकी पत्नी को बेवजह सज़ा मिलती है. पंजाब सरकार को इस योजना से बहुत सी आशाएँ हैं.

लेकिन किरण बेदी कहती हैं, “आप जेल को घर नहीं बना सकते... जेल में सुधार के और बहुत से तरीक़े हैं, शिक्षा दें, कला सिखाएं, उनका रवैया बदलने की कोशिश करें, जेल एक सुधार नगर तो बन सकता है लेकिन घर नहीं... लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि आप जुर्म का शिकार होने वाले की भावनाओं को नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते.” ये योजना महिला क़ैदियों को भी दी जाएगी और परिवार का ख़र्च सरकार उठाएगी.

मंत्री के अनुसार योजना अगले साल मार्च से शुरू करने की कोशिश की जा रही है.

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