चाहें तो मुझे फाँसी दे दें: क़साब

अजमल क़साब
Image caption क़साब ने ख़ुद जज के सामने जुर्म क़बूल किया.

विशेष अदालत में मुंबई हमलों के मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य अभियुक्त मोहम्मद अजमल आमिर क़साब ने कहा है कि वह फाँसी की सज़ा पाने के लिए तैयार है.

इससे पहले सोमवार को सुनवाई के दौरान उसने अपना गुनाह क़बूल कर लिया था. इसके अगले दिन मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई थी.

सरकारी वकील उज्जवल निकम ने बताया कि बुधवार को जब फिर सुनवाई शुरु हुई तो क़साब ने इस मामले में जल्दी सज़ा सुनाए जाने की माँग की.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक जब जज एमएल तहलियानी ने क़साब से पूछा, 'तुम इसी दुनिया से सज़ा पाना चाहते हो या ऊपर वाले से', इस पर क़साब ने कहा, 'अगर सज़ा फाँसी है तो मुझे फाँसी दे दी जाए'.

सुनवाई के दौरान क़साब के वकील ने जज से कहा कि वो दबाव में बयान दे रहा है. लेकिन जब जज ने क़साब से पूछा कि क्या उन पर किसी तरह का दबाव है तो उनका कहना था, "नहीं. मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है".

अभियोजन पक्ष सतर्क

हालाँकि उज्जवल निकम ने कहा कि अभियोजन पक्ष क़साब के इक़बालिया बयान और फाँसी की सज़ा देने के बयान को सतर्कता से ले रहा है.

उनका कहना था, "अभी हमारे पास कई सबूत हैं और क़साब को कई चीजें बतानी है, जैसे- क्या वह भारत में वह किसी से संपर्क में था, हमलों के बाद उसकी योजना क्या थी और हमलों के पीछे कौन-कौन लोग थे."

सरकारी वकील ने कहा कि क़साब ने इससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष कहा था, "उसे फाँसी दे दी जाए ताकि और लोग जेहादी बन सकें लेकिन बाद में वो पलट गया. फिर अभी वह इस तरह का बयान नहीं दे रहा है."

उनका कहना था, "कामा अस्पताल के पास क़साब और उसके साथी की गोलीबारी में मुंबई पुलिस के तीन आला अधिकारी मारे गए लेकिन क़साब ये बताने की कोशिश कर रहा है कि गोलियाँ उसके साथी ने चलाई थी."

उज्जवल निकम की दलील थी कि क़साब पूरा गुनाह क़बूल नहीं कर रहा है और दूसरों को दोषी बता रहा है.

पिछले साल 26 नवंबर की रात चरमपंथियों ने मुंबई के भीड़-भाड़ वाले छत्रपति शिवाजी टर्मिनल स्टेशन, ताज होटल, ट्राइडेंट-ऑबराय होटल और नरीमन हाउस पर हमले किए थे.

इन हमलों में 170 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोग घायल हुए थे.

हमलावरों में मोहम्मद अजमल क़साब जीवित पकड़ा गया और बाकी नौ मारे गए.

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