गूजर नेता सरकार से बातचीत को राज़ी

गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला
Image caption गूजर आरक्षण की माँग को लेकर पिछले दो साल से आंदोलन कर रहे हैं

राजस्थान में गूजर समुदाय के लिए आरक्षण की माँग को लेकर 'महापड़ाव' का नेतृत्व कर रहे गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला सरकार से बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं.

इस मामले को लेकर सोमवार को राज्य विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ.रविवार को गूजर नेताओं ने आरक्षण की मांग को लेकर सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. अपनी माँग को लेकर गूजर समुदाय के लोग बड़ी संख्या में करौली ज़िले में महापड़ाव पर बैठे हुए हैं.

सोमवार को सरकार ने आंदोलित गूजर नेताओं को बातचीत का प्रस्ताव भेजा, जिसके बाद किरोड़ी सिंह बैंसला का कहना था कि महापड़ाव पर बैठे लोगों की ओर से अनुमति मिलने के बाद वे बातचीत के लिए तैयार हुए हैं.

उन्होंने कहा, "हमने भीड़ को जानकारी दी कि सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया है उसपर उनकी क्या प्रतिक्रिया है तो लोगों ने हाथ उठाकर बातचीत की अनुमति दी."

हालांकि महापड़ाव इस सहमति के बाद भी टला नहीं है. बैंसला का कहना है कि सरकार की ओर से बातचीत का 'सकारात्मक प्रस्ताव' आया है लेकिन निर्णायक बातचीत तक महापड़ाव जारी रहेगा.

विधान सभा में हंगामा

दूसरी ओर गूजरों की मांग के समर्थन में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने विधानसभा में जमकर हंगामा किया.

विधानसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए सुरक्षाकर्मियों को भी बुलाना पड़ा. बाद में स्पीकर ने दिनभर के लिए विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी.

हालाँकि भाजपा के विधायक विरोध स्वरूप विधानसभा के अंदर ही बैठे हैं. राज्य विधानसभा में उनकी संख्या 50 के क़रीब है.

ग़ौरतलब है कि गूजर नेता अपनी बिरादरी के लिए अंतरिम राहत के तौर पर पाँच प्रतिशत आरक्षण की माँग कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि वो इस पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत है. लेकिन उससे पहले क़ानूनी अड़चन को दूर करना होगा.

आंदोलित गूजर नेताओं का कहना है सरकार को ऐसा करने में कोई क़ानूनी रूकावट नहीं है. यह केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति का मामला है.

पिछली सरकार के कार्यकाल में ही राज्य में गूजर आरक्षण की मांग ने एक उग्र आंदोलन का रूप ले लिया था. इस दौरान जहाँ राज्य सरकार गूजरों की मांगों को पूरा कर पाने में असमर्थ रही थी वहीं विरोध प्रदर्शनों को दौरान हुई पुलिस गोलीबारी में कुछ आंदोलनकारियों की मौत भी हो गई थी.

अपनी मांग पर अड़े गूजरों के साथ कोई बीच का रास्ता निकाल पाना या उनकी मांगों को मानना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है.

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