गुजकोक बिना संशोधन पारित

  • 29 जुलाई 2009

'गुजरात संगठित अपराध नियंत्रण (गुजकोक) विधेयक' में संशोधन के राष्ट्रपति के सुझाव को अनदेखा करते हुए गुजरात विधानसभा में इसे दोबारा पारित कर दिया गया है.

Image caption नरेंद्र मोदी ने पहले ही कह दिया था कि सरकार इसे फिर से पारित करके केंद्र के पास भेजेगी

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने मंगलवार को इस विधेयक को दोबारा पारित कर केंद्र की यूपीए सरकार के साथ टकराव की एक और स्थिति पैदा कर दी है.

यह विधेयक वर्ष 2004 में राज्य विधानसभा में पारित किया गया था. लेकिन राष्ट्रपति ने पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर गुजकोक विधेयक को लौटा दिया था.

विधेयक को लौटाते हुए राष्ट्रपति ने तीन बदलावों के सुझाव दिए थे, जिसे राज्य सरकार ने खारिज करते हुए इसे फिर से पारित कर दिया.

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने ही कहा था कि इस विधेयक को बिना किसी संशोधन के एक बार फिर से केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा.

फिर भेजा जाएगा

जब विधेयक पारित हुआ तो सदन में सिर्फ़ सत्तारुढ़ पक्ष के सदस्य मौजूद थे और उन्होंने इस विधेयक को सर्वसम्मति से मंज़ूरी दे दी.

विपक्षी कांग्रेस के विधायकों ने जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में सदन से बहिष्कार कर दिया था. गुजकोका विधेयक को दोबारा सदन में पेश करते हुए राज्य के गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ''राष्ट्रपति ने जो बदलाव सुझाए हैं उनको सदन स्वीकार नहीं कर सकता. यदि हम राष्ट्रपति के सुझावों को शामिल करते हैं तो गुजकोक विधेयक एक और भारतीय दंड संहिता बन जाएगा जो गुजरात के लिए अच्छी बात नहीं है, जिसकी ज़मीनी और समुद्री सीमा पड़ोसी देश पाकिस्तान से जुड़ी है.''

सरकार की ओर से विधेयक में 'संगठित अपराध' की जगह 'आतंकवाद' जैसा शब्द जोड़ दिया गया है.

इस संशोधन के बारे में सफ़ाई देते हुए गृहमंत्री शाह ने कहा, ''जब हमने पहली बार गुजकोक पेश किया था, तब आतंकवाद से लड़ने में सक्षम पोटा कानून लागू था. इसलिए हमने संगठित अपराधों से लड़ने के लिए एक कानून तैयार किया. लेकिन अब जबकि पोटा नहीं है, हमारे पास आतंकवाद से लड़ने के लिए कोई विशेष कानून नहीं है. इसलिए हमने विधेयक में 'आतंकवाद' शब्द जोड़ा है और 'आतंकवादी गतिविधियों' को परिभाषित किया है.'' शाह ने यह भी कहा कि विधेयक को एक बार फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति ने केंद्रीय कैबिनेट की सलाह पर राज्य सरकार से कहा था कि गुजकोका विधेयक के उपबंध 16 को हटा दिया जाए जो पुलिस के समक्ष किसी व्यक्ति के दोष मानने को मुकदमे में मान्य करता है.

राष्ट्रपति ने इसके अलावा दो अन्य उपबंधों 20-2(बी) और 20(4) में बदलाव का सुझाव दिया था.

गुजरात कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी पर गुजकोक के बहाने राजनीति करने का आरोप लगाया है.

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