राजस्थान में सकारात्मक बातचीत

गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला
Image caption गूजर आरक्षण की माँग को लेकर पिछले दो साल से आंदोलन कर रहे हैं

राजस्थान में गूजर समुदाय के लिए आरक्षण की माँग को लेकर गूजर प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है.

बातचीत के बाद गूजर नेता जितेंद्र सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में हुई है और गूजर प्रतिनिधि बुधवार को राज्यपाल से मुलाक़ात कर के आगे की चर्चा करेंगे.

सरकार की ओर से वार्ता कर रहे अतर सिंह ने भी इसकी पुष्टि की है और बताया है कि कल गूजर नेताओं की मुलाक़ात राज्यपाल से तय हुई है.

जितेंद्र सिंह का कहना था कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता तब तक गूजरों का महापड़ाव जारी रहेगा और यह आंदोलन शांतिपूर्ण ही रहेगा.

गूजरों का प्रतिनिधिमंडल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में शाम को राजधानी जयपुर पहुंचा था.

सोमवार को राज्य सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए गूजर नेताओं को बातचीत के लिए राज़ी कर लिया था.

इससे पहले भाजपा के एक विधायक और राज्य सरकार के पूर्व मंत्री कालूलाल गूजर ने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात की है. उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद बीबीसी को बताया कि बातचीत सकारात्मक रही है और अगर राज्य सरकार अपनी कही बातों पर क़ायम रहती है तो यह बहुत अच्छा होगा.

उधर, इस मामले को लेकर सोमवार को राज्य विधानसभा में हंगामा करने वाले विधायकों में से तीन को एक वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है.

तीनों ही विधायक विपक्षी दल, भारतीय जनता पार्टी के हैं. सोमवार को गूजरों की मांग के समर्थन में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने विधानसभा में जमकर हंगामा किया था.

इससे पहले रविवार को गूजर नेताओं ने आरक्षण की मांग को लेकर सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. अपनी माँग को लेकर गूजर समुदाय के लोग बड़ी संख्या में करौली ज़िले में महापड़ाव पर बैठे हुए हैं.

बातचीत पर सहमति

सोमवार को सरकार ने आंदोलित गूजर नेताओं को बातचीत का प्रस्ताव भेजा, जिसके बाद किरोड़ी सिंह बैंसला का कहना था कि महापड़ाव पर बैठे लोगों की ओर से अनुमति मिलने के बाद वे बातचीत के लिए तैयार हुए हैं.

उन्होंने कहा, "हमने भीड़ को जानकारी दी कि सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया है उसपर उनकी क्या प्रतिक्रिया है तो लोगों ने हाथ उठाकर बातचीत की अनुमति दी."

हालांकि महापड़ाव इस सहमति के बाद भी टला नहीं और गूजर नेताओं का कहना है कि यह तबतक जारी रहेगा जबतक उनकी मांगों को मान नहीं लिया जाता है.

ग़ौरतलब है कि गूजर नेता अपनी बिरादरी के लिए अंतरिम राहत के तौर पर पाँच प्रतिशत आरक्षण की माँग कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि वो इस पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत है. लेकिन उससे पहले क़ानूनी अड़चन को दूर करना होगा.

आंदोलित गूजर नेताओं का कहना है सरकार को ऐसा करने में कोई क़ानूनी रूकावट नहीं है. यह केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति का मामला है.

पिछली सरकार के कार्यकाल में ही राज्य में गूजर आरक्षण की मांग ने एक उग्र आंदोलन का रूप ले लिया था. इस दौरान जहाँ राज्य सरकार गूजरों की मांगों को पूरा कर पाने में असमर्थ रही थी वहीं विरोध प्रदर्शनों को दौरान हुई पुलिस गोलीबारी में कुछ आंदोलनकारियों की मौत भी हो गई थी.

अपनी मांग पर अड़े गूजरों के साथ कोई बीच का रास्ता निकाल पाना या उनकी मांगों को मानना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है.

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