उमर का इस्तीफ़ा नामंज़ूर

  • 28 जुलाई 2009
उमर अब्दुल्ला
Image caption उमर अब्दुल्ला ख़ासे गुस्से में नज़र आए

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर विपक्ष के एक विधायक की ओर से गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल एनएन वोहरा को सौंप दिया है.

राज्यपाल ने फ़िलहाल इसे मंज़ूर नहीं किया है और ज़ांच पूरी होने तक उनसे पद पर बने रहने को कहा है.

गवर्नर हाउस से मिले आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे 'पीडीपी विधायक के आरोपों की समयबद्ध जाँच कराएँ और यदि वे संतुष्ट हैं कि उन आरोपों का कोई आधार है तो तत्काल उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लें.'

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के मुज़फ़्फ़र बेग ने मंगलवार को दो साल पहले राज्य में हुए एक सेक्स कांड की जाँच में उमर अब्दुल्ला का नाम आने का आरोप लगाया था.

बाद में उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने सेक्स कांड मामले में दो सूचियाँ बनाई थी. एक सूची उन अभियुक्तों की है जिनके ख़िलाफ़ कार्रवाई चल रही है. एक दूसरी सूची उन लोगों की है जिनके नाम जाँच के दौरान सामने आए और उस सूची में उमर अब्दुल्ला का नाम भी है. ये दूसरी सूची सीबीआई अदालत को सौंप चुकी है."

राज्यपाल की ओर से कहा गया है कि पहले उन्हें इन आरोपों का विस्तृत ब्योरा दिया जाए और इस बारे में उन्होंने विधानसभा से सभी बयानों और दस्तावेज़ों की पुष्ट प्रतियों की माँग भी की है. जब तक राज्यपाल इस बारे में फ़ैसला करते हैं, तब तक उमर अब्दुल्ला को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने को कहा गया है.

उधर केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने मीडिया को बताया, "मेरी जानकारी के मुताबिक वर्ष 2006 में केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने जो चार्जशीट दायर की थी उसमें 17 अभियुक्त हैं और उमर अब्दुल्ला का नाम इनमें नहीं है."

इस मामले में जब बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने सीबीआई प्रवक्ता हर्ष भाल से बातचीत की और ताज़ा स्थिति जाननी चाही तो उन्होंने कहा कि सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट गृहमंत्रालय और जम्मू कश्मीर एसेंबली के स्पीकर को भेज दी है. अब आगे की सूचना वहीं से मिलेगी क्योंकि संसद सत्र चल रहा है.

उमर ने कड़ा रुख़ अपनाया

जब विधानसभा में ये आरोप लगाए गए तो ख़ासे परेशान और गुस्से में दिखाई दे रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कड़ा रुख़ अपनाया.

उन्होंने विधानसभा में कहा "आम तौर पर जब आरोप लगते हैं तो व्यक्ति को जब तक दोषी न पाया जाए उसे निर्दोष माना जाता है. लेकिन ये इस तरह के आरोप हैं कि जब तक इस कलंक या धब्बे से मुझे निर्दोष नहीं साबित किया जाता तब तक मैं इस पद पर बना नहीं रहना चाहता."

भावुक दिखते हुए उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "मैं यहाँ से सीधे गवर्नर साहब के पास जाकर अपना त्यागपत्र सौंप दूँगा."

हालाँकि उनकी पार्टी के विधायकों ने उमर अब्दुल्ला को रोकने और समझाने की काफ़ी कोशिश की लेकिन वे किसी की बात मानने को तैयार नहीं थे.

इस घटना के तीन घंटे बाद उन्होंने राज्यपाल एनएन वोहरा को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया.

राज्यपाल को उनके इस्तीफ़ा सौंपने के बाद उमर अब्दुल्ला के राजनीतिक सलाहकार देवेंदर राणा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "यह जानने के बावजूद कि उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप झूठे हैं, उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया है. उन्होंने नैतिकता के आधार पर ये कदम उठाकर देश में राजनीतिक बहस को एक नया आयाम दिया है.

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