'ये विदेश नीति की सबसे बड़ी भूल है'

यशवंत सिन्हा
Image caption यशवंत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री बोलें तो वे भारत-पाक बयान पर कुछ विशेष सवालों के जवाब ज़रूर दें

भारतीय जनता पार्टी के नेता यशवंत सिन्हा ने मिस्र के भारत-पाक साझा बयान पर कहा है कि 'भारत की विदेश नीति के इतिहास में शायद इतनी भयानक भूल पहले कभी नहीं हुई और आज ये नहीं कहा जा सकता कि भारत की विदेश नीति कहाँ खड़ी है.'

लोकसभा में भारत-पाक साझा बयान पर बहस में बोलते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर तीखे प्रहार किए और कहा कि सातों समुद्र का पानी एकत्र करने के बाद भी यदि शर्म अल शेख की शर्म को धोने का प्रयास किया जाएगा तो ये पर्याप्त नहीं होगा.

साझा बयान पर क़ायम हैं मनमोहन सिंह

'सवालों का जवाब दें'

उनका कहना था, "इससे पहले विदेश नीति पर विपक्ष को भरोसे में लिया जाता था. अब तक पाकिस्तान पर जो भी नीति रही उसमें पूरे राष्ट्र की सहमति थी. पहली बार ये सहमति चरमरा गई है, ध्वस्त हो गई है...मुंबई हमलों के बाद पहली बार इस साझा बयान ने आतंकवाद से पीड़ित और हमलावर को बराबरी का दर्जा दे दिया..बलूचिस्तान को साझा बयान में क्यों शामिल किया गया? आज पाकिस्तान कह रहा है कि बलूचिस्तान में भारत का हाथ होने के सबूत वह सही समय पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाएगा..."

पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मनमोहन अपना बयान दें तो वे उनके कुछ सवालों जवाब ज़रूर दें. उन्होंने कहा, "क्या साझा बयान के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वास बढ़ा है. जून से जुलाई में क्या बदल गया जो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री का मन बदल गया. पाकिस्तान बलूचिस्तान का ढिंढोरा पीट रहा है. वर्ष 2006 के हवाना वाले भारत-पाक साझा आतंकवाद निरोधक तंत्र की क्या उपलब्धी है. वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत-पाक शांति प्रक्रिया अब पटरी से उतर नहीं सकती. क्या वे उस बयान पर अब भी कायम हैं?" पाकिस्तान के गृह मंत्री ने कहा है लश्कर नेता हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ सबूत नहीं हैं...हमारे गृह मंत्री कह रहे हैं कि हमने पर्याप्त सबूत दिए हैं...अफ़ग़ानिस्तान और भारत की सदियों की मित्रता है जो पाकिस्तान तोड़ने की कोशिश कर रहा है...प्रधानमंत्री ने कहा कि बलूचिस्तान पर कोई (डोसिए) दस्तावेज़ नहीं है..मैं जानना चाहता हूँ कि आतंकवाद और समग्र वार्ता के मुद्दों को एक दूसरे से अलग करने का संदर्भ क्या है?" तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि साझा बयान अभी जारी हुआ ही था कि भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने इसके चीथड़े भी उड़ा दिए और जो कहा वो पूरी तरह विरोधाभासी था.

यशवंत सिन्हा का कहना था, "जहाँ पाकिस्तान ने कहा ये बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है वहीं भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि पाक जब तक आतंकवाद का सामना नहीं करता और आतंक के आधारभूत ढांचे को ध्वस्त नहीं करता तब तक वे भारत में जनसमर्थन को साथ लेकर नहीं चल सकूँगा उन्होंने पूछा कि वर्ष 2006 की हवाना बातचीत के बाद साझा आतंकवाद निरोधक तंत्र के तहत कितनी जानकारी साझा हुई है और दूसरी ओर अमरीका देनों देशों के बीच जज और अंपायर का काम कर रहा है.

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