विधानसभा में हंगामा, श्रीनगर में झड़पें

  • 29 जुलाई 2009
उमर अब्दुल्ला
Image caption उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में लगातार तीसरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तू तू - मैं मैं हुई है और भारी हंगामा हुआ है. विधानसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा है.

उधर श्रीनगर की सड़कों पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और नेशनल कॉन्फ़्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं और खूब नारेबाज़ी हुई है. पीडीपी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे एनसी कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस का इस्तेमाल किया है.

मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायक मुज़फ़्फ़र बेग ने आरोप लगाया था कि उनका नाम एक सेक्स कांड के संबंध में केंद्रीय जाँच ब्यूरो की सूची में आया है. इसके बाद क्रोधित दिख रहे उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और इसे राज्यपाल को सौंप दिया था.

ग़ौरतलब है कि बुधवार को जब ये घटनाक्रम घटा तब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सदन में मौजूद नहीं थे.

'स्थिति स्पष्ट करें'

जब बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरु हुई तो भाजपा नेता चमनलाल गुप्ता ने स्पीकर से पूछा कि ये स्पष्ट किया जाए कि राज्यपाल ने इस्तीफ़ा स्वीकार किया है या नहीं और सरकार अस्तित्व में है या नहीं है.

स्पीकर मोहम्मद अक़बर लोन ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से बात की और उनसे पूछा कि क्या वे विधानसभा की कार्यवाही जारी रखें.

स्पीकर के अनुसार राज्यपाल ने उन्हें स्पष्ट किया कि उमर अब्दुल्ला का इस्तीफ़ा फ़िलहाल स्वीकार नहीं किया गया है . उन्होंने ये भी कहा कि सीबीआई ने बताया है कि सेक्स कांड के सिलसिले में जो चार्जशीट दायर की गई है उसमें उमर अब्दुल्ला का नाम नहीं है.

न्यायिक जाँच की माँग

इस पर विधानसभा में हंगामा होने लगा. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायकों ने कहा कि उन्हें 'सीबीआई की जाँच पर कोई भरोसा नहीं है और पूरे मामले की न्यायिक जाँच होनी चाहिए.'

विधानसभा में ख़ासा हंगामा हुआ और पीडीपी के विधायक काफ़ी देर शोर मिचाते रहे.

उधर नेशनल कान्फ़्रेंस और कांग्रेस के 12 विधायकों ने पीडीपी विधायक मुज़फ़्फ़र बेग और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ़्ती के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार प्रस्ताव का नोटिस दिया है. उनका आरोप है कि इन दोनों लोगों ने उचित प्रस्ताव लाए बिना विधानसभा के एक सदस्य के ख़िलाफ़ व्यक्तिगत आरोप लगाए.

उधर जम्मू के सदस्यों ने जम्मू क्षेत्र के लिए अलग विधानसभा के पक्ष में नारे लगाना शुरु कर दिया और फिर विधानसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा.

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