बातचीत ही एकमात्र रास्ता: मनमोहन

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने कहा कि पाकिस्तान ने कार्रवाई के बारे में ताज़ा दस्तावेज़ सौंपे हैं

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ भारत को ''परखने और विश्वास करने के'' सिद्धांत पर आगे बढ़ना होगा क्योंकि आज की परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच बातचीत ही एकमात्र रास्ता है.

भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की ओर से शर्म अल शेख में जारी साझा बयान पर विवाद खड़ा होने के बाद बुधवार को संसद में इसपर बहस हो रही थी.

पाकिस्तान के साथ संबंधों पर भारत सरकार के पक्ष को रखते हुए उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ता है तो कई क्षेत्रों में दोनों देशों को इसका लाभ मिलेगा लेकिन पाकिस्तान की धरती से चरमपंथ को बढ़ावा मिलता रहा और भारत उससे प्रभावित होता है तो इन तमाम बातों के बावजूद हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं. हमारी सरकार का यही पक्ष है और हम इस पर क़ायम हैं.''

मनमोहन सिंह पर विपक्ष का तीखा प्रहार

बलूचिस्तान के मुद्दे पर सरकार को घेरे जाने की बातों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि साझा बयान के बारे में जो प्रचारित किया जा रहा है और इस संदर्भ में संयुक्त बयान का जो मतलब निकाला जा रहा है, वो सरासर ग़लत है.

उन्होंने कहा, "भारत के काउंसलेट पिछले 50 साल से जलालाबाद और अन्य क्षेत्रों में हैं. भारत का पक्ष हमेशा पारदर्शी रहा है. हम पाकिस्तान से भी पारदर्शिता की ही उम्मीद रखते हैं. हमने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से कहा कि अगर आपके पास कोई सबूत हो तो सामने लाएं. उन्होंने अभी तक कोई सबूत पेश नहीं किया है."

बुधवार को संसद में अपने भाषण में प्रधानमंत्री सधी भाषा के साथ साझा बयान पर क़ायम रहते हुए आगे बढ़े.

उन्होंने कहा कि साझा बयान में न तो हमने भारत के लोगों के विश्वास को तोड़ा है और न ही भारत के पक्ष को किसी भी स्तर पर कमज़ोर होने दिया है. पाकिस्तान ख़ुद भी आतंकवाद का भुक्तभोगी है. बातचीत हो और हम आगे बढ़े, यही समय की ज़रूरत है.

मुंबई का मुद्दा

दरअसल, मुंबई में पिछले वर्ष के चरमपंथी हमले को ही आधार बनाकर प्रधानमंत्री पर विपक्ष और सरकार से बाहर बैठे दलों का हमला होता रहा. इसीलिए प्रधानमंत्री मुंबई के मसले पर पाकिस्तान की कार्रवाई का ब्यौरा देने से नहीं चूके.

प्रधानमंत्री ने कहा, "पाकिस्तान ने प्रतिबद्धता जताई है कि किसी भी स्थिति में भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा. मेरी पेरिस यात्रा से दो दिन पहले ही पाकिस्तान ने 34 पन्ने का दस्तावेज भारत को सौंपा है. इसमें जांच कार्यों, हमले की साजिश में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ दायर एफ़आईआर की प्रति और दोषियों की तस्वीरें हैं. संचार के माध्यमों, नेविगेशन आदि का भी ब्यौरा मौजूद है."

उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा, ''पाकिस्तान में मुंबई हमले से संबंधित ज़कीउर्रहमान लकवी सहित पाँच दोषी हिरासत में हैं. इनके ख़िलाफ़ पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधक क़ानून के तहत चार्जशीट दायर किया गया है. इतिहास में यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने किसी चरमपंथी गतिविधि में अपनी ज़मीन के इस्तेमाल को स्वीकारा है और उसपर कार्रवाई की है.''

कूटनीतिक प्रयासों के चलते पैदा हुए दबाव की चर्चा भी मनमोहन सिंह ने की. उन्होंने स्पष्ट किया कि हमलों के तुंरंत बाद लश्करे तैबा और उसके साथी संगठनों पर सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंध लगा दिया था. भारत ने पाकिस्तान से स्पष्ट कह दिया है कि मुंबई हमलों के दोषियों के ख़िलाफ़ पाकिस्तान को कार्रवाई करनी ही पड़ेगी. पाकिस्तान ने कुछ क़दम उठाए भी हैं.

सदन में मुलायम सिंह यादव की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "हम जितने चाहे, दोस्त बना सकते हैं पर जब-जब सुरक्षा का मुद्दा आएगा, हमें आत्मनिर्भर ही रहना होगा और यही आज के दौर की सच्चाई है. हमें अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त, और आधुनिक बनाने की ज़रूरत है. साथ ही आंतरिक सुरक्षा को भी मज़बूत करने, खुफ़िया तंत्र को पुख़्ता करने की भी ज़रूरत है."

मनमोहन सिंह ने कहा, "पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर गंभीर है.उन्होंने मुझसे पूछा, क्या आप पाकिस्तान पर विश्वास करते हैं. मैं समझता हूँ कि हमें ट्रस्ट बट वेरीफ़ाई के सिद्धांत के साथ चलना चाहिए. पाकिस्तान में वर्तमान नेतृत्व आतंकवाद के प्रति गंभीर है. वहां के सांसद भी इस मुद्दे पर गंभीरता से क़दम उठाने पर सहमत हैं. जबतक कि हम यह न तय कर लें कि हमें पाकिस्तान के साथ युद्ध करना है, बातचीत और संवाद ही एकमात्र तरीका है, समाधान का और कोई विकल्प नहीं है."

अन्य दलों के तर्क

बुधवार को संसद में जहाँ प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की संयुक्त बयान के लिए निंदा की, वहीं सरकार से बाहर बैठे अन्य दलों ने भी प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लिया.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायमसिंह यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान से बातचीत के मुद्दे पर चाहे जितनी भी सफाई दें. देशभर में संदेश ग़लत चला गया है.

उन्होंने कहा, ''संदेश यह कि भारत दबाव में हैं. मुंबई हमले के बाद सरकार ने कहा था कि कार्रवाई नहीं होने तक बातचीत नहीं होगी. फिर किस आधार पर बातचीत की और बातचीत की तो सोच-समझकर बातचीत क्यों नहीं की.''

उनका कहना था,"सफल विदेश नीति वही है जिसमें दोस्ती ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से हो. ईरान के मुद्दे पर हम अमरीका के दबाव में रहे. निंदा तक न कर सके. हमने ताशकंद में ग़लती की थी जिसे हम बर्दाश्त नहीं कर पाए. हम ग़लती फिर कर रहे हैं. देश अपनी पहचान रही गुट निरपेक्ष नीति से हट रहा है. पाकिस्तान अभी बाज नहीं आ रहा है. हम सभी पड़ोसी देशों से दोस्ती चाहते हैं. आप बताएं कि हमारा दोस्त कौन है. संबंध अच्छे हो सकता है, हों.पर दोस्त कोई नहीं है."

मुलायम ने कड़े शब्दों में कहा, "भारत की विदेश नीति को राजनीतिक इच्छा शक्ति, संकल्पशक्ति और साहस चाहिए. देश का सम्मान बचाने के लिए ऐसा करना ही होगा हालांकि इनमें से एक भी नहीं दिख रहा. इन तीनों पर विचार करना ही पड़ेगा. सारी दुनिया में पाकिस्तान को इस चर्चा से लाभ हुआ है और भारत को नुकसान हुआ है. अब सही यही है कि प्रधानमंत्री जी, जो हस्ताक्षर करके आए हो, उनको रद्दी की टोकरी में फेंक दीजिए."

विपक्ष की आलोचना कर रहे सत्तापक्ष के नेताओं को घेरते हुए शरद यादव ने कहा कि इतिहास की ग़लतियों की वजह से ही हम लोग विपक्ष में बैठे हैं. इतिहास की ग़लतियों की दुहाई देकर कबतक सरकार अपनी आज के दोषों को छिपाएगी.

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