'हिंसा के माहौल में वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी'

भारत और पाकिस्तान के झंडे
Image caption भारत-पाकिस्तान साझा बयान पर दो दिन तक बहस के बाद भी विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ

भारत-पाक साझा बयान पर विपक्ष की तीखी आलोचना झेल रहे भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा है कि हिंसा या हिसा की धमकी के वातावरण में पाकिस्तान के साथ बातचीत में प्रगति नहीं हो सकती.

उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है भारत और पाकिस्तान को पुल बनाने चाहिए, दीवारें नहीं खड़ी करनी चाहिए.

ग़ौरतलब है कि लोकसभा में दो दिन तक भारत-पाकिस्तान साझा बयान और विदेश नीति के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई है. सरकार विपक्ष को इस मुद्दे पर संतु्ष्ट नही कर पाई है और गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी ने इन मुद्दों पर सदन से वॉकआउट किया था.

'पुल बनाएँ, दीवारे न खड़ी करें'

शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा, "भारत अपने पड़ोस में आतंकवाद के ख़तरे को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है. पाकिस्तान के साथ हमारी बातचीत में प्रगति तब तक संभव नहीं है जब तक वातावरण हिंसा या हिंसा की धमकी से दूषित रहता है."

उनका कहना था कि 16 जुलाई 2009 के भारत-पाकिस्तान साझा बयान में ये विचार स्पष्ट है कि पाकिस्तान के साथ अर्थपूर्ण वार्ता तभी हो सकती है जब वह अपनी भूमि भारत के ख़िलाफ़ गतिविधियों के लिए इस्तेमाल न होने देने का अपना वादा पूरा करे."

उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने इस्लामाबाद में कहा, "बातचीत (दोनों देशों के बीच) ज़रुरी है और राजनीतिक नेताओं को पुल बनाने चाहिए और दीवारें नहीं खड़ी करनी चाहिए."

उन्होंने भारतीय प्रधामंत्री मनमोहन सिंह के संसद में दिए उस बयान पर उनकी प्रशंसा की जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर करने के लिए बातचीत ही एक विकल्प है.

उनका कहना था, "मनमोहन सिंह साहब ने बड़े साहस से संसद में अपने विचार रखे हैं और मैं उनके विचारों की कदर करता हूँ. ये उनके नेतृत्व और समझ का सबूत है कि वे इस बात को समझते हैं कि बातचीत ही आगे बढ़ने का रास्ता है. इसका कोई विकल्प नहीं है."

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