छत्तीसगढ़ के विधायक पहुंचे राजस्थान

Image caption छत्तीसगढ़ के विपक्ष के विधायक भी माउंट आबू पहुंचे हैं.

छत्तीसगढ़ विधान सभा के लगभग आधे सदस्य अध्यात्म और सुख शांति का पाठ पढ़ने राजस्थान के माउंट आबू चले आए हैं.

इनमें पक्ष-विपक्ष दोनों के विधायक शामिल है.ये विधायक और मंत्री दो दिन तक यहाँ ब्रह्मकुमारी संस्था में नेतृत्व विकास और राजयोग का सबक सीखेंगे. इनमे मु्ख्यमंत्री रमन सिंह भी शामिल है.

मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की आलोचना की है और कहा है कि गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर नेता एक नहीं होते मगर अपनी सुख सुविधा पर उन्हें एक स्वर में बोलने में कोई दिक्कत नहीं होती.

छत्तीसगढ़ विधान सभा के क़रीब 38 सदस्य रविवार को जब सुरम्य माउंट आबू पहुंचे तो वहां न तो सलवा जुडूम और उसके प्रतिगामी नक्सल आन्दोलन की कर्कश गूंज थी और ना ही गरीबी से शापित आदिवासियों के कुम्हलाए चेहरे.

केंद्र में पसरी नीरव शांति में जब मंत्री ,विधायक और विपक्ष ने राजयोग का ध्यान किया तो उन्हें बहुत सुकून मिला.

सार्वजनिक निर्माण मंत्री ,राजेश मुनोत का कहना था, ''पहले दिन कोई तीन सत्र थे, बहुत अच्छा लगा.इससे सदन का काम और बेहतर करने में मदद मिलेगी.''

यूँ तो भारत में संसद हो या विधान सभा,गरीबी के खात्मे और भ्रष्टाचार उन्मूलन जैसे मुदे कभी पक्ष विपक्ष एक नहीं होते लेकिन छत्तीसगढ़ विधान सभा के पक्ष विपक्ष की विभाजन रेखा माउंट आबू आकर ओझल हो गई लगती है.

दोनों पक्षों ने हाथ मिला लिया और अध्यात्म के तलाश में जुट गए.

मुख्या मंत्री रमन सिंह,स्पीकर धरमलाल कौशिक और विपक्ष के नेता रविन्द्र चौबे ब्रह्मकुमारी संस्था में एकाकार थे और वो दो दिन तक राजयोग अध्यात्म के शिविर में भाग लेंगे.

मुनोत कहते हैं, ''यहाँ न कोई सत्ता पक्ष है ना कोई विपक्ष ,पूरा पारिवारिक माहौल है क्योंकि सब अपने अपने परिवारों के साथ आए है.''

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की राष्ट्रीय सचिव कविता श्रीवास्तव प्राय छत्तीसगढ़ जाती रही है.

वो कहती हैं, ''एक निर्धनता से लड़ते सूबे के रहनुमाओ को ऐसे आयोजनों में शिरकत करना अच्छा नहीं लगता . छत्तीसगढ़ में चर्चा के लिए बहुत ज्वलंत विषय है.योजना आयोग के मुताबिक कोई 44 फीसद लोग गरीब है,मुझे समझ में नहीं आता गरीबी जैसे मुद्दे पर ये नेता हाथ क्यों नहीं मिलाते.''

वैसे संसद में कई बार देखा गया है कि सांसद अपने वेतन के मुद्दे पर एक राय हो जाते हैं लेकिन कम ही होता है कि वो किसी और मुद्दे पर एक साथ वोट डालें या राय व्यक्त करें.

छत्तीसगढ़ में विपक्ष के नेता रविंद्र चौबे कहते है, ''ये आयोजन शांति,सद्भावव और विकास के लिए किया जा रहा है.इससे एक सकारात्मक सोच बनाने में मदद मिलेगी.आप जानते है हाल में कई राज्यों में सदन में हंगामे के नज़ारे पेश आए है.हम दोनों पक्ष बैठ कर एक ऐसा माहौल बनाना चाहते है,जो बाकि सदनों के लिए नज़ीर बने,इस कार्यकर्म को इसी नज़र से देखना चाहिए.''

प्राकृतिक संसाधनों से मालामाल छत्तीसगढ़ में आदिवासी कभी अलसाये तेंदू पतों में जिन्दगी की राह खोजता है,कभी महुआ की छणभंगुर मादकता में जीवन का उल्लास ढूँढ लेता है लेकिन उनके रहनुमाओं को सुकून की तलाश माउंट आबू तक खींच लाती है.