'गुजरात सरकार मुआवज़ा दे'

  • 3 अगस्त 2009

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि वह सोहराबुद्दीन शेख़ के परिवारवालों को मुआवज़ा दे. सोहराबुद्दीन शेख़ और दो अन्य लोग वर्ष 2005 में एक फ़र्जी मुठभेड़ में मारे गए थे.

Image caption सोहराबुद्दीन शेख़ वर्ष 2005 में मारे गए थे

जस्टिस तरुण चटर्जी और आफ़ताब आलम की विशेष खंडपीठ ने मुआवज़े की राशि तय नहीं की.

राज्य सरकार के वकील मुकुल रोहतगी ने खंडपीठ से अपील की कि मुआवज़ा तय करना राज्य सरकार पर छोड़ दिया जाए.

सुप्रीम कोर्ट की विशेष खंडपीठ ने यह भी कहा कि वो फ़र्जी मुठभेड़ का मामला विशेष जाँच टीम (एसआईटी) को सौंपने पर भी विचार करेगी. गोधरा कांड के बाद हुए सांप्रदायिक दंगे की जाँच एसआईटी कर रही है.

घटना

वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन शेख़ को पुलिस ने मुठभेड़ में मार दिया था. इस व्यक्ति को चरमपंथी करार दिया गया था.

26 नवंबर 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस की एक मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन शेख़ मारे गए थे.

बाद में सोहराबुद्दीन शेख़ के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाकर न्याय की गुहार लगाई और दावा किया कि मुठभेड़ फ़र्जी था.

इसके बाद इस मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों- डीजी वंज़ारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश कुमार एमएन को गिरफ़्तार किया गया था.

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