मणिपुर में मुठभेड़ की न्यायिक जाँच

मणिपुर में सुरक्षा
Image caption उत्तर पूर्वी राज्यों में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार मिले हुए हैं

मणिपुर सरकार ने कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले में न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं.

मणिपुर के मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने बुधवार देर शाम पत्रकारवार्ता में कहा कि चोंगखाम संजीत मुठभेड़ मामले से जुड़े छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.

मुख्यमंत्री का कहना था,'' आगे की कार्रवाई न्यायिक जाँच की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी.''

उनका कहना था कि राज्य सरकार गुवाहाटी हाईकोर्ट से अनुरोध करेगी कि वह एक मौजूदा जज को न्यायिक जाँच की ज़िम्मेदारी सौंपे.

हालांकि उन्होंने ये स्पष्ट नहीं किया कि न्यायिक जाँच की रिपोर्ट की समयसीमा क्या होगी.

उल्लेखनीय है कि कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ के भारी विरोध को देखते इंफाल में कर्फ़्यू लगाना पड़ा था.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आत्मसमर्पण कर चुके विद्रोही चोंगखाम संजीत को पुलिस ने फ़र्जी मुठभेड़ में मार दिया है.

संजीत को राज्य विधानसभा के पास गत 23 जुलाई को पुलिस कमांडो ने एक कथित मुठभेड़ में मार दिया था.

स्थानीय टेलीविज़न में दिखाया गया है कि उस दिन संजीत को घसीटकर एक मॉल में ले जाया गया था और फिर कुछ समय बाद उसके शव को बाहर लाया गया.

प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने मंगलवार को कई जगह आग लगा दी थी और सरकारी वाहनों पर हमला किया.

इंफाल में अब भी तनाव की स्थिति बनी हुई है.

पिछले कुछ सालों में मणिपुर में कई विवादास्पद मौते हुई हैं. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मणिपुर में सुरक्षा बल क़ानून के तहत मिले विशेष अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं.

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