पुणे में जांच के लिए भीड़

स्वाइन फ़्लू
Image caption स्वाइन फ़्लू को लेकर पुणे के लोगों में दहशत है

देश में एच वन एन वन वायरस से हुई पहली मौत ने हड़कंप मचा दिया है.पुणे में रिदा शेख की मौत के बाद सरकारी अस्पताल के बाहर मुंह पर मास्क लगाए और आंखो में डर लिए लोगो का टेस्ट करवाने के लिए तांता लगा हुआ है.

पिछले दो दिनों से नायडू अस्पताल के बाहर लगभग 1100 लोग जांच के लिए आ चुके हैं. ये जांच पुणे के नायडू और औंध जनरल अस्पताल में हो रही है. वहां शुरुआती जांच के लिए 15 स्क्रीनिंग केन्द्र खोले गए है ताकि जिनमें कुछ ही लक्षण है उनकी शंकाओं का निवारण वही हो सके.

उधर दिल्ली, तमिलनाडु और केरल में भी जिन लोगों में भी इस वायरस के लक्षण दिखाई दे रहे है वो भी सरकारी अस्पतालों का रुख कर रहे है.

ये ऐसे राज्य है जहां विदेशों से आवाजाही भी होती है लेकिन यहां सबसे ज़रुरी बात ये है कि जिन्हें भी खांसी,जुकाम और बुखार है वो घर पर ही रहने की बजाय अस्पताल जा रहे है जिससे संक्रमण का ख़तरा और बढ़ जाता है.

विश्व स्वास्थय संगठन और अमेरिका के सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल और ब्रिटेन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के दिशा निर्देशों के अनुसार जिन लोगों में भी स्वाइन फलू के लक्षण पाये जाते है उन्हें ये सलाह दी गई है कि वो घर से न निकलें.

खांसते और छींकते वक्त मुंह को ढक कर रखें और हाथो को साफ रखें. साथ ही लक्षणों में सुधार न होने की स्थिति में अस्पताल जाना जाएं.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में मेडिसीन विभाग में प्रोफेसर और सरकार की स्वाइन फलू पर बनी कमेटी के सदस्य डा रणदीप गुलेरिया के अनुसार कुछ दिशानिर्देश भारत ने भी दिए है और जैसे जैसे आगे की स्थिति को देखकर और दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगें.

उनका कहना था, ''अमेरिका और ब्रिटेन ने भी अपने दिशानिर्देश जारी किए है तो मैं तो ये कहूंगा कि जिनको भी फ्लू जैसे लक्षण हों उनके लिए ये ज़रूरी है की वह घर पर रहे. बाहर जाएं.लोगों से न मिलें.भीड़ भाड वाली जगहों पर न जाएं क्योंकि जब वो खांसेंगे तो उनके आस -पास जो लोग हैं उन्हें भी वायरस लग सकता हैं और उनमें भी बीमारी फ़ैल सकती है.''

भारत में स्वाइन फलू का सबसे पहला मामला आंध्र प्रदेश में सामने आया था लेकिन इस समय महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा लोग स्वाइन फलू से ग्रसित हैं. इसके बाद दूसरे नंबर पर दिल्ली और तीसरे नंबर पर आंध्रप्रदेश है.

डॉ रणदीप गुलेरिया के अनुसार अभी तक स्वाइन फलू के लगभग 600 मामले आ चुके हैं.

उन्होंने बताया कि अब तक केवल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेबल डिज़ीज़ और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाइरालॉजी में ही जांच की जा सकती थी लेकिन अब 18 लैब बनाए गए हैं.

संबंधित समाचार