अब निजी लैबों में भी जाँच

  • 8 अगस्त 2009

केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वह सुविधायुक्त निजी लैबों को स्वाइन फ़्लू की जाँच करने की अनुमति प्रदान कर दें.

Image caption पुणे के मामले के बाद से जाँच के लिए अस्पताल पहुँचने वालों की संख्या इस तरह से बढ़ गई है.

सरकार ने राज्य सरकारों को दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे स्वाइन फ़्लू की जाँच और इलाज के लिए अस्पतालों की संख्या में बढ़ोत्तरी करें.

सरकार की ओर से संसद में आश्वासन दिया गया है कि स्वाइन फ़्लू नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की ज़रुरत नहीं है.

इस बीच दिल्ली में तीन डॉक्टरों और पुणे में एक डॉक्टर के स्वाइन फ़्लू से पीड़ित होने की ख़बर मिली है.

दिशा-निर्देश

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव नरेश दयाल ने दिल्ली में जानकारी दी है कि केंद्र सरकार की ओर से राज्यों के मुख्य सचिवों को जारी दिशा निर्देशों में इसके अलावा राज्य स्तर पर हेल्पलाइन सेवा शुरु करने को भी कहा है.

उन्होंने बताया कि राज्यों को कहा गया है कि एक तो वे स्वाइन फ़्लू की जाँच और इलाज की सुविधा और अधिक अस्पतालों में उपलब्ध करवाएँ और सुविधासंपन्न निजी पैथोलॉजी लैबों को जाँच करने और निजी अस्पतालों को इलाज की भी अनुमति दे दी जाए.

उनका कहना था केंद्र सरकार ने निजी अस्पतालों और लैबों को इसकी जाँच से कभी नहीं रोका था.

उन्होंने बताया कि सरकार इंतज़ाम कर रही है कि 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में किसी भी समय एक हज़ार लोगों की इलाज की सुविधा मुहैया करवा दी जाए और दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में किसी भी समय 10 हज़ार लोगों के इलाज की सुविधा उपलब्ध हो.

उन्होंने एक पत्रकारवार्ता में बताया कि देश में अब तक स्वाइन फ़्लू के 615 मामले सामने आए हैं जिनमें से 470 को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है.

उनका कहना था कि स्वाइन फ़्लू का वायरस कम उम्र के लोगों को ज़्यादा नुक़सान पहुँचा रहा है. उन्होंने बताया कि 10 से 19 साल की उम्र के 229 लोगों में स्वाइन फ़्लू के एच-वन एन-वन वायरस पाए गए हैं.

उन्होंने लोगों को आश्लस्त किया है कि घबराने की ज़रुरत नहीं है.

कुछ इसी तरह का आश्वासन देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने संसद में कहा है कि स्वाइन फ़्लू नियंत्रण में है.

मामले

Image caption कम उम्र के बच्चों और नवयुवाओं में बीमारी जल्दी फैलती है

इस बीच पुणे में स्वाइन फ़्लू के दो गंभीर मामले मिले हैं. इनमें से एक डॉक्टर हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.

उधर दिल्ली में भी तीन डॉक्टरों में स्वाइन फ़्लू के वायरस पाए गए हैं.

पुणे में 14 वर्ष की लड़की रिदा शेख़ की मौत के बाद से वहाँ अस्पतालों में जाँच करवाने के लिए लोगों को लंबी कतारें लगी हुई हैं.

दिल्ली में भी बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों में स्वाइन फ़्लू के वायरस की जाँच करवाने पहुँच रहे हैं.

पुणे में अब तक स्वाइन फ़्लू के 120 मामले सामने आए हैं.

महाराष्ट्र सरकार ने सतारा और पुणे ज़िलों को महामारी बीमारी क़ानून के मुताबिक़ संवेदी घोषित किया है. इससे सरकार को वहाँ महामारी रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने में सुविधा होगी.

इस बीच तमिलनाडु सरकार ने सलाह जारी कर महाराष्ट्र के स्वाइन फ़्लू पीड़ित इलाक़ों से राज्य में आने वाले लोगों की जाँच करने को कहा है.

वैक्सीन

स्वाइन फ़्लू के इलाज के लिए दवा तो उपलब्ध है लेकिन अब तक इसकी रोकथाम के लिए कोई टीका नहीं बनवाया जा सका है.

भारत के स्वास्थ्य सचिव नरेश दयाल ने कहा है कि चार से सात महीनों के भीतर टीका विकसित कर लिया जाएगा.

उन्होंने पत्रकारों को बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीका विकसित करने के लिए भारत को वायरस का सीड स्टॉक उपलब्ध करवाया है.

उल्लेखनीय है कि भारत में तीन दवा कंपनियाँ स्वाइन फ़्लू का टीका विकसित करने का प्रयास कर रही हैं.

इनमें से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही मौसमी फ़्लू का टीका विकसित करने के लिए काम कर रहा है.

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