'किसी को भूखा नहीं रहने देंगे'

किसान
Image caption कम बारिश से चावल भंडार घटने की आशंका है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सूखे के कारण भारत मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा है.

उन्होंने शनिवार को दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ कम बारिश से पैदा हुई स्थिति पर चर्चा की. मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अनाजों की कोई कमी नहीं है और किसी को भी भूखा नहीं रहने दिया जाएगा.

उनका कहना था, "देश के कई हिस्सों में कम बारिश के कारण खेती पर बुरा असर पड़ा है. धान की खेती का दायरा 60 लाख हेक्टेयर घटा है."

हालाँकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि पिछले दो वर्षों में हुई ज़बरदस्त पैदावार से भंडारों में पर्याप्त अनाज है और इस बार हुई कमी की पूर्ति सुरक्षित भंडार से हो सकती है.

बैठक में कृषि मंत्री शरद पवार भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री ने कहा कि सूखा प्रभावित इलाक़ों में अगर अनाज की कमी आती है तो सरकार कुछ कड़े क़दम उठाने और बाज़ार में दखल देने से नहीं हिचकेगी.

उन्होंने कहा, "हम प्रभावित राज्यों को हर संभव मदद देंगे. किसी भी स्थिति में हम अपने नागरिकों को भूखा नहीं रहने देंगे."

प्रधानमंत्री ने माना कि ख़रीफ़ की फ़सल प्रभावित होने से आने वाले समय में कीमतों में वृद्धि हो सकती है. इसके लिए उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बेहतर बनाने की ज़रूरत बताई.

उन्होंने कहा कि अनाजों की कालाबाजारी करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करनी होगी और जनवितरण प्रणाली को मज़बूत करना होगा.

Image caption प्रधानमंत्री ने किसानों को वैकल्पिक फ़सल उगाने की सलाह दी.

सहायता के लिए तैयार

प्रधानमंत्री का कहना था, "अगर राज्यों के पास आपदा राहत कोष पर्याप्त नहीं है तो उन्हें तुरंत राष्ट्रीय आपदा कोष के तहत सहायता मांगनी चाहिए. लेकिन अभी तक किसी भी राज्य से केंद्र को इस तरह का प्रस्ताव नहीं मिला है."

अभी तक पूरे देश में 141 ज़िलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकारें किसानों को डीज़ल पर जो सब्सिडी दे रही हैं, उसका आधा भार केंद्र सरकार उठाने को तैयार है.

उन्होंने कहा कि प्रभावित राज्यों के किसानों को केंद्रीय पूल से अतिरिक्त बिजली दी जाएगी. मनमोहन सिंह ने किसानों से वैकल्पिक अनाजों की खेती करने की सलाह दी.

उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मिलने वाली सहायता का उपयोग नहीं करने के लिए राज्यों की खिंचाई की.

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