बिहार के 26 ज़िले सूखाग्रस्त

  • 10 अगस्त 2009
सूखाग्रस्त
Image caption कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में सामान्य से 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई है.

बिहार सरकार ने राज्य के 38 ज़िलों में से 26 को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है. इन क्षेत्रों में किसानों को आपदा राहत नियमानुसार मिलने वाली तमाम सुविधाएँ राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी.

बिहार मंत्रिपरिषद की सोमवार को पटना में हुई बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार राज्य के इन सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राजस्व लगान और कृषि ऋण की वसूली रोक दी जाएगी.

साथ ही सिंचाई संबंधी बिजली शुल्क और नहर या राजकीय नलकूपों के पटवन शु्ल्क फ़िलहाल नहीं लिए जाएंगे.

राज्य सरकार के ज़रिए अब किसानों को तीन के बजाए चार पटवन के लिए डीज़ल ख़रीदने में अनुदान (सब्सिडी) सहायता मिलेगी. खाद और बीज के अलावा पशुचारा भी रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे.

इस आपदा राहत मद में ख़र्च होने वाली बड़ी धनराशि का बोझ राज्य सरकार अकेले नहीं उठा सकती है इसलिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से जल्दी और पर्याप्त मात्रा में अनाज के साथ-साथ तत्काल 10 हज़ार करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक सहायता माँगी है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि राज्य के कुछ और ज़िले सूखाग्रस्त हो सकते हैं, क्योंकि अभी उन ज़िलों से इस बाबत ज़रूरी सूचनाएँ नहीं मिल पाई हैं.

सामान्य से कम वर्षा

राज्य सरकार के आपदा प्रबंधक विभाग में प्रधान सचिव व्यास जी मिश्र ने बीबीसी को बताया कि सामान्य से कम वर्षा और धान की रोपाई में कमी संबंधी आँकड़ों के आधार पर राज्य के 26 ज़िलों को सूखा प्रभावित माना गया है.

उनके अनुसार केंद्रीय टीम के ज़रिए जायज़ा लिए जाने के बाद इस संबंध में तय की जाने वाली विशेष आर्थिक सहायता राशि में से 75 प्रतिशत केंद्र सरकार और बाक़ी 25 प्रतिशत राज्य सरकार देगी.

उन्होंने बताया कि बिहार के बाढ़ पीड़ित इलाक़ों में आपदा राहत व्यवस्था के लिए अलग से केंद्रीय मदद माँगी गई है.

राज्य के 26 ज़िलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने से एक दिन पहले रविवार को पटना में राज्य सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.

इस बैठक में निर्णय लिया गया था कि मौजूदा सूखा संकट को लेकर बिहार के सभी राजनीतिक दलों के ज़रिए एक संयु्क्त ज्ञापन केंद्र सरकार को दिया जाएगा.

इस बीच कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि बिहार में सामान्य से 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई है और वो भी समय पर नहीं होने से धान की फ़सल मारी गई है.

लेकिन विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि अगर आगामी रबी फ़सल यानी दलहन, मक्का और गेंहूँ के लिए अभी से योजनाबद्ध तैयारी की जाए तो भारी अन्न संकट की आशंका से बचा जा सकता है.

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