'सीबीआई जाँच का प्रस्ताव'

शोपियाँ में बंद
Image caption दो महिलाओं की बलात्कार के बाद हुई हत्या के विरोध में जम्मू कश्मीर में मई से ही आंदोलन हो रहा है.

भारत प्रशासित कश्मीर में राज्य सरकार ने शोपियाँ में दो महिलाओं की बलात्कार के बाद हुई हत्या के मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जाँच कराने का प्रस्ताव रखा है.

इस बात की घोषणा विधानसभा में बुधवार दोपहर राज्य के वरिष्ठ मंत्री अब्दुल रहीम राठर ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से की.

मीडिया में मृतक महिलाओं की डीएनए जाँच रिपोर्ट के ग़लत होने की ख़बर आने के बाद इस मामले में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गया था.

विपक्ष का समर्थन

विधानसभा में राठर ने कहा कि मामले की जाँच सीबीआई से कराने का आदेश देने से पहले सरकार हाई कोर्ट से सलाह-मशविरा करेगी क्योंकि कोर्ट इस मामले की जाँच पर निगाह रखे हुए है.

इस मामले की जाँच पुलिस महानिरीक्षक फ़ारूक अहमद के नेतृत्व में राज्य पुलिस की विशेष जाँच दल (एसआईटी) कर रही है.

सरकार के इस प्रस्ताव का विपक्ष ने विरोध नहीं किया और मामले का फ़ैसला विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ दिया.

विधानसभा अध्यक्ष मोहम्मद अक़बर लोन ने सरकार के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.

दोनों मृतक महिलाओं की डीएनए जाँच रिपोर्ट के ग़लत होने की बात एसआईटी ने बुधवार को हाईकोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी की है.

हाई कोर्ट की चिंता

एसआईटी की जाँच रिपोर्च से विचलित दिख रहे मुख्य न्यायधीश बारिम घोष ने कहा, "हम किसी को भी हमसे सच्चाई छीनने की अनुमति नहीं देंगे. हमसे देरी हो सकती है लेकिन हम सच्चाई का पता लगाएँगे."

घोष उस दो सदस्सीय खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे हैं जो इस मामले की निगरानी कर रही है.

उन्होंने राज्य के महाधिवक्ता और बार एसोसिएशन से पूछा कि सच्चाई का पता लगाने के लिए क्या किया जाना चाहिए.

ग़ौरतलब है कि 29 मई को नीलोफ़र और आसिया के लापाता होने की ख़बर आई थी. उसके अगले दिन दोनों के शव मिले थे. पुलिस जाँच में बलात्कार के बाद हत्या की बात सामने आई.

निलोफर के पति और आसिया के भाई ने अदालत से कहा कि अगर जाँच करने वाली एजेंसी चाहे तो सच का पता घंटे भर में चल सकता है.

अगले दिन इनके शव बरामद हुए थे. पुलिस जाँच में इन महिलाओं के बलात्कार के बाद उनकी हत्या किए जाने की बात सामने आई थी.

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