भाजपा विधायक आडवाणी से मिलेंगे

  • 14 अगस्त 2009
भाजपा नेता
Image caption वसुंधरा शुक्रवार को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मिल रही हैं.

राजस्थान की राज्य भारतीय जनता पार्टी इकाई में शुरू हुई अंतर्कलह अब खुलकर सतह पर आ गई है.

पार्टी के चालीस से ज़्यादा विधायक दिल्ली में डटे हुए हैं. वे वसुंधरा राजे को विधानसभा में विपक्ष की नेता के पद से हटाने के ख़िलाफ़ हैं.

इन विधायकों ने सबसे पहले पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मुलाक़ात की और उसके बाद वे पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के घर पर पहुँचे.

आडवाणी ने भाजपा विधायकों से मिलने से इनकार कर दिया जिसके बाद वसुंधरा समर्थक विधायक राजस्थान भवन लौट गए.

संभावना जताई जा रही है कि शुक्रवार शाम को किसी समय आडवाणी और वसुंधरा समर्थक विधायकों की मुलाक़ात हो सकती है.

उधर वसुंधरा राजे ने कहा है कि उन्हें ऐसा कोई संदेश नहीं मिला है जिसके मद्देनज़र वो अपना पद छोड़ दें. उन्होंने कहा कि वो राजस्थान की जनता की सेवा करना चाहती है पर साथ ही ये भी कहा की पार्टी का कोई निर्देश होगा तो वो उसे मानेगीं.

जयपुर में गुरुवार को ही यह ख़बर चर्चा का विषय बन गई थी. ऐसी ख़बरों के सामने आने के बाद भाजपा में गतिविधियां तेज़ हो गई कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राजे को अपना पद त्याग कर दिल्ली आने की हिदायत दी है.

शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

इसके बाद उनके समर्थक विधायक राजे के सरकारी निवास पर जमा होने लगे. इन विधायको के तेवर तल्ख़ हैं और वो राजे के पक्ष में अपनी ताकत का प्रदर्शन करने को तैयार हैं.

ये विधायक जयपुर के उस रिसॉर्ट में जमा हुए जहाँ एक समय झारखंड के भाजपा विधायक राजनीतिक संकट के वक़्त ठहरे थे.

इस बार पार्टी के विधायक अपनी नेता के लिए होटल में लामबंद हुए है. इन विधायकों में से एक, विजय बंसल बागी स्वर में कहते हैं कि विधायकों ने सर्वसम्मति से वसुंधरा राजे को नेता चुना है, आखिर बिना विधायकों की राय के उन्हें कैसे हटाया जा सकता है.

उन्होंने यह तक कह डाला कि वसुंधरा राजे के बिना भाजपा यहाँ कुछ भी नहीं है.

राजे समर्थक और एक पूर्व मंत्री दिगंबर सिंह भी ठीक इसी लहजे में कहते हैं कि राजे के क़द का राज्य में कोई नेता नहीं है.

इससे पहले भाजपा ने पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनावों में हार के बाद सुधार का काम हाथ में लिया और पहले पार्टी अध्यक्ष ओपी माथुर की छुट्टी की और बाद में अब राजे को भी पद छोड़ने का पैगाम भेजा मगर राजे समर्थक इसे मानने को तैयार नहीं है.

वसुंधरा राजे ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें किसी नेता ने पद छोड़ने को नहीं कहा है.

उन्होंने कहा, ''राजस्थान तो मेरा घर है, जब हम यहाँ सत्ता में रहे है तो अब जनता के दुःख में शिरकत रहना चाहते है. ये ठीक नहीं होगा कि जब लोग मुसीबत में हों, आप दूर हो जाएं मगर लगता है कि पार्टी उनकी ये दलील सुनने को तैयार नहीं हैं."

भाजपा में ये संकट ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य के लोग बिजली पानी की किल्लत से परेशान होकर विपक्ष की ओर मदद के लिए देख रहे थे. मगर भाजपा अभी अपनी ही आन्तरिक कलह से मुक्त नहीं हो पा रही है.

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