राजस्थान भाजपा का संकट और गहराया

भाजपा
Image caption केंद्रीय नेतृत्व और वसुंधरा राजे का टकराव खुलकर सामने आ गया है

राजस्थान मे भारतीय जनता पार्टी का संकट गहराता जा रहा है.

भाजपा आलाकमान और वसुंधरा राजे दोनों अपने-अपने रुख़ पर कायम हैं. पार्टी हाईकमान की ओर से वसुंधरा से इस्तीफ़ा खुलकर मांगा जा चुका है. उधर वसुंधरा का कहना है कि वो अपने पद पर बनी रहेंगी.

वसुंधरा राजे राजस्थान में पिछली भाजपा नेतृत्व वाली सरकार में मुख्यमंत्री थीं और फिलहाल राज्य विधानसभा में विपक्ष की नेता हैं.

राज्य और केंद्रीय चुनावों में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की गाज उन पर गिरी है और पार्टी ने उनसे इस्तीफ़ा मांगा है लेकिन उनके समर्थन में दिल्ली आए विधायकों से पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी मिले तक नहीं.

साथ ही पार्टी ने अपने विधायकों से कहा है कि वे ऐसी किसी गतिविधि में भाग न लें जो अनुशासन भंग होने की श्रेणी में आती हो.

पार्टी की राज्य इकाई ने यह बात तब कही जब वसुंधरा राजे के पक्ष में दिल्ली गए विधायकों की केंद्रीय नेतृत्व से बात नहीं बनी और वे बगावत की ज़ुबान इस्तेमाल करने लगे.

राजनीतिक घटनाक्रम

पार्टी हाईकमान ने वसुंधरा राजे को इस बाबत दिल्ली तलब किया था मगर उन्होंने दिल्ली नहीं जाना ही ठीक समझा.

इस बीच राजे के समर्थक विधायकों में से ज्यादातर दिल्ली का चक्कर लगाकर जयपुर वापस आ गए हैं. इन विधायकों की शनिवार को जयपुर में एक बैठक करके आगे की रणनीति घोषित करने का कार्यक्रम है.

समझा जाता है की बागी तेवर अपनाए ये विधायक किसी क्षेत्रीय दल के गठन का ऐलान भी कर सकते हैं.

भाजपा और राजे समर्थकों में दूरियां इतनी बढ़ गई हैं कि विकल्प के रूप में किसी नए दल पर विचार किया जा रहा है. वसुंधरा राजे ने फिलहाल इस बारे में मौन साध रखा है लेकिन उनके हिमायती विधायक कह रहे हैं कि अगर राजे को विपक्ष के नेता पद से हटाया गया तो पार्टी का विभाजन हो जाएगा.

राज्य भाजपा के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने बीबीसी से कहा की उन्हें केंद्रीय नेतृत्व ने सूचित किया है कि राजे से त्यागपत्र मांग लिया गया है. उन्होंने कहा, ''हम उम्मीद करते हैं कि कोई विधायक या कार्यकर्ता पार्टी का अनुशासन नहीं तोड़ेगा. मुझे पार्टी ने विधिवत सूचित किया है कि वसुंधरा राजे को नेता पद से इस्तीफा देने को कह दिया गया है.

इस बीच भाजपा नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री हरिशंकर भाभरा ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे वसुंधरा राजे ने बागी तेवर अपनाए हुए हैं. ये ठीक नहीं है कि वो विधायकों को उकसाएं. पार्टी हाईकमान को कुछ करना चाहिए.

बागी तेवर

उधर राजे की करीबी विधायकों का कहना है की आखिर आंतरिक लोकतंत्र की भी बात है. जब सारे विधायक राजे के साथ हैं तो फिर उन्हें कैसे हटाया जा सकता है.

ऐसा लगता है कि भाजपा और राजे में छिड़ी जंग का दायरा और बढ़ता जा रहा है. वैसे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जैसे पदों के लिए पार्टी का अंदरूनी घमासान कोई नहीं बात नहीं है मगर विपक्ष के नेता पद को लेकर ऐसा द्वंद शायद पहली बार देखने को मिला होगा.

शुक्रवार को राजस्थान में पार्टी के 78 में से 57 विधायकों नें दिल्ली आकर कहा कि वसुंधरा को राजस्थान भाजपा विधायक दल के नेता के पद से नहीं हटाया जाना चाहिए.

सभी 57 विधायक लगभग आधे घंटे तक लाल कृष्ण आडवाणी के घर के बाहर खड़े रहे लेकिन मुलाक़ात नहीं होने पर वापस राजस्थान भवन लौट गए.

भाजपा आलाकमान ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के बुरे प्रदर्शन के बाद राजस्थान में पार्टी के अध्यक्ष ओपी माथुर की छुट्टी कर दी थी.

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है