'ग्रामीण विकास पर बल, हरित क्रांति की ज़रूरत'

भारत का 63वां स्वतंत्रता दिवस

भारत की आज़ादी की 62वीं वर्षगांठ पर लालकिले से देशवासियों को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि देश के ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है. उन्होंने एक और हरित क्रांति भारत में लाने की बात की.

साथ ही दोहराया कि उनकी सरकार देश की आर्थिक विकास की दर को दोबारा नौ प्रतिशत के स्तर तक लाने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा कि भारत में सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए एक क़ानून जल्द ही लाने की दिशा में भी सरकार गंभीर है.

उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में स्वाइन फ़्लू जैसी समस्या देश के कुछ हिस्सों में लोगों को प्रभावित कर रही है. उन्होंने कहा, कि इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर हर ज़रूरी कोशिश करती रहेगी. साथ ही लोगों को बताया कि हालात ऐसे नहीं कि डर और घबराहट की वजह से काम रुक जाएं.

देश की आर्थिक विकास दर वर्ष 2004-05 से 2007-08 तक नौ प्रतिशत की दर से बढ़ी लेकिन 2008-09 के बाद 6.7 प्रतिशत हो गई. यह भारत सरकार की नीतियों का ही नतीजा रहा कि जिस समय पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की मार झेल रही थी, विकास दर सुधरी रही है. बाकी देशों की तुलना में हमपर इसका कम असर पड़ा.

प्रधानमंत्री ने शनिवार की सुबह साढ़े सात बजे लालकिले पर भारत का राष्ट्रीय तिरंगा झंडा फहराने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, "पिछले दिनों हुए चुनावों में देश का लोकतंत्र और मज़बूत हुआ है. आपने एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था को चुना है जो धर्मनिरपेक्ष है. जो लोकतांत्रिक जीवन शैली आपने चुनी है, वो बातचीत से समाधान में विश्वास रखती है. आपने नए युग की शुरुआत के लिए जनादेश दिया है."

आर्थिक विकास पर ज़ोर

उन्होंने कहा, "देश की आर्थिक विकास दर वर्ष 2004-05 से 2007-08 तक नौ प्रतिशत की दर से बढ़ी लेकिन 2008-09 के बाद कुछ कम होकर 6.7 प्रतिशत हो गई. यह भारत सरकार की नीतियों का ही नतीजा रहा कि जिस समय पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की मार झेल रही थी, विकास दर सुधरी रही है. बाकी देशों की तुलना में हमपर इसका कम असर पड़ा. हम वापस विकास दर को नौ प्रतिशत पर लाएंगे."

इस बार मानसून में कमी है. इसका विपरीत प्रभाव फसलों पर पड़ेगा पर मुझे यकीन है कि इसका सामना बखूबी कर पाएंगे. हर प्रकार की मदद किसानों को दी जाएगी ताकि वो इस स्थिति से उबर सकें. मानसून को देखते हुए बैंकों से कर्ज़ वापसी की समयावधि को आगे बढ़ा दिया गया है.

उन्होंने कहा कि इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे, चाहे वो देश में ज़्यादा पूंजी लाने के हों या सरकारी निवेश बढ़ाने के हों. हमें उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक हालात में सुधार होगा. व्यापारियों, उद्योगपतियों से अपील है कि अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाएं और हमारे साथ मिलकर काम करें.

मानसून की मार झेल रहे देश के सामने उन्होंने इस संकट को भी स्वीकारा. उन्होंने कहा, "इस बार मानसून में कमी है. इसका विपरीत प्रभाव फसलों पर पड़ेगा पर मुझे यकीन है कि इसका सामना बखूबी कर पाएंगे. हर प्रकार की मदद किसानों को दी जाएगी ताकि वो इस स्थिति से उबर सकें. मानसून को देखते हुए बैंकों से कर्ज़ वापसी की समयावधि को आगे बढ़ा दिया गया है. खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी."

साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना का विस्तार पूरे देश में किया गया है. अबतक चार करोड़ परिवार लाभान्वित है. आने वाले समय में और पारदर्शिता और जवाबदेही लाएंगे. इस योजना के तहत नए किस्म के काम भी जोड़े जाएंगे.

उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. प्राथमिक शिक्षा लगभग हर बच्चे की पहुंच में है. अब माध्यमिक शिक्षा पर बल देने की ज़रूरत है.

मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री ने कहा कि ताज़ा जनादेश ने लोकतंत्र को मज़बूती दी है

जलवायु परिवर्तन के वैश्विक संकट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वातावरण के प्रदूषण को रोकने की ज़रूरत है. भारत जलवायु परिवर्तन का सामना दुनिया के अन्य देशों के साथ मिलकर करना चाहता है. इसके लिए देश में आठ मिशन बनाए गए हैं जिसके तहत हम प्रतिबद्ध हैं. 14 नवंबर को इस दिशा में जवाहरलाल नेहरू नेशनल सोलर मिशन की शुरुआत की जाएगी.

उन्होंने कहा कि देश में रहनेवाले करोंड़ों लोगों के लिए जीवन स्रोत है गंगा नदी. इसे बचाने के लिए और साफ रखने के लिए राष्ट्रीय गंगा प्राधिकरण बनाया गया है. साथ ही पेयजल के संकट की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि पानी बचाओ हमारे देश में एक राष्ट्रीय नारा होना चाहिए.

सांप्रदायिकता पर चोट

पिछले दिनों अलग-अलग हिस्सों में अलग अलग मुद्दों को लेकर जो हिंसा देखने को मिली, इस ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "लोगों को अपने गुस्से का इज़हार करने का पूरा हक़ है. सरकारों को लोगों की असहमतियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए. पर असहमति के लिए हिंसा का सहारा लेने वालों के प्रति लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है. इनसे सख़्ती से निपटेंगे. सांप्रदायिक हिंसा को रोकने की दिशा में क़ानूनी प्रावधान बनाए जाएंगे."

सरकार महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द पास कराने के लिए प्रतिबद्ध है. हम ऐसा क़ानून बनाने के लिए भी काम हो रहा है जिसके द्वारा ग्रामीण और शहरी इकाइयों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा. सभी लोकतांत्रिक इकाइयों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की ज़रूरत है

चरमपंथ की समस्या पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में आतंकी हमले के बाद ऐसी घटनाओं के ख़िलाफ़ कई क़दम उठाए गए हैं. सुरक्षा और खुफ़िया तंत्र को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है.

साथ ही नक्सलवाद के सवाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश का कुछ हिस्सा नक्सलवाद की समस्या से परेशान है. सरकार का फर्ज है कि लोगों की सुरक्षा करें. जो सोचते हैं कि बंदूक के दम पर राज किया जा सकता है वो हमारी लोकतंत्र की मज़बूती को नहीं समझ पाए.

प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकारा कि सामाजिक और आर्थिक असंतोष के कारणों को खत्म करने का भी प्रयास करेंगे जिससे नक्सलवाद जैसी समस्या पैदा होती है.

महिलाओ की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में बोलते हुए उन्होंने कहा, "सरकार महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द पास कराने के लिए प्रतिबद्ध है. हम ऐसा क़ानून बनाने के लिए भी काम हो रहा है जिसके द्वारा ग्रामीण और शहरी इकाइयों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा. सभी लोकतांत्रिक इकाइयों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की ज़रूरत है."

दुनिया के कई देशों से भारत के संबंधों की बेहतरी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के लगातार बदलते हुए हालात में भारत के हितों में काम कर सकने वाली विदेश नीति की भारत को ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि हम पड़ोसियों के साथ अमन और शांति से रहना चाहते हैं. ऐसा माहौल पैदा करने की पूरी कोशिश करेंगे जो दक्षिण एशिया के हित में हों.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.