'नक्सलियों के लिए दोतरफ़ा नीति'

भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि आंतरिक सुरक्षा मज़बूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर काम करेंगी.

इसी मुद्दे पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए पी चिदंबरम ने कहा कि देश के पूर्वोत्तर के कुछ राज्य अलगाववाद के सामने कई बार झुक जाते हैं जिसकी वजह से वहां अलगाववाद की समस्या से निपटने में मुश्किलें पैदा होती हैं.

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का ज़िक्र करते हुए पी चिदंबरम ने कहा कि नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए "हम बात करेंगे,काम करेंगे और विकास की गतिविधियाँ चलाएंगे."

गृहमंत्री ने देश में नक्सल समस्या से निपटने के लिए अपनी सरकार की दोतरफा नीति की घोषणा भी की.

अपनी इस नीति पर प्रकाश डालते हुए गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र को नक्सालियों से मुक्त किया जायेगा और फिर वहां विकास के काम कराए जाएंगे.

ख़तरा कम नहीं

पिछले साल नवंबर में मुंबई पर हुए हमले का ज़िक्र करते हुए गृहमंत्री ने कहा, "हालाँकि उसके बाद से देश में कोई भी आतंकवादी हमला नहीं हुआ है लेकिन इसका मतलब ये नहीं निकाला जाना चाहिए कि आतंकवाद का खतरा कम हो गया है या ख़त्म हो गया है."

चिदंबरम ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि वो केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तर्ज़ पर ही राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल गठित करें.

गृहमंत्री का कहना था कि इस तरह के सुरक्षा बल के बहुत फायदे हैं और वो चाहेंगे कि इस सलाह पर राज्य सरकारें उन्हें अपनी प्रतिक्रिया दें.

भारत के गृहमंत्री का कहना था कि "हम राज्य सरकारों को उत्साहित करेंगे कि वो नक्सालियों से बात करें--निजी तौर पर और स्थानीय इकाइयों के तौर पर भी, जिससे कि वो मुक्ति के लिए अपनाए गए सशस्त्र संघर्ष का रास्ता छोड़ दें."

जम्मू कश्मीर में चरमपंथी गतिविधियों का ज़िक्र करते हुए गृहमंत्री का कहना था कि वहां परिस्थिति में प्रत्यक्ष सुधार आया है.

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