गुजरात में जसवंत की किताब पर प्रतिबंध

प्रदर्शन
Image caption कुछ जगह जसवंत सिंह की किताब के विरोध में प्रदर्शन भी हुए हैं

भारतीय जनता पार्टी शासित गुजरात राज्य ने पार्टी से निकाले गए वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह की किताब - 'जिन्ना: इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस' की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है.

अहमदाबाद से स्थानीय पत्र महेश लंगाह के अनुसार गुजरात के गृह राज्यमंत्री अमित शाह ने बताया है कि राज्य के गृह मंत्रालय ने एक आदेश के ज़रिए किताब पर प्रतिबंध लगाया है क्योंकि उसमें सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में कई जगह 'अपनामजनक तरीके से ज़िक्र किया गया है.'

अमित शाह के हवाले से कहा गया है कि गुजरात सरकार मानती है कि 'सरदार पटेल भारत के बड़े नेता थे और गुजरात के महान सपूत थे और यदि उनका ज़िक्र अपमानजनक तरीके से होता है तो ये स्वीकार्य नहीं है.'

ग़ौरतलब है कि अपनी किताब 'जिन्ना: इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस' में और उसके बारे में मीडिया को दिए साक्षात्कारों में जसवंत सिंह ने 1947 में भारत के विभाजन के लिए केवल मोहम्मद अली जिन्ना को ही नहीं बल्कि तब के कांग्रेस नेतृत्व, विशेष तौर पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तब के भारतीय गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को भी ज़िम्मेदार ठहराया है.

भाजपा सदस्यता ख़त्म

गुरुवार को शिमला में भारतीय जनता पार्टी की चिंतन बैठक के दौरान भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने पत्रकारों को बताया था कि पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में जसवंत सिंह के विचारों से सहमत नहीं है.

उन्होंने पत्रकारों के समक्ष घोषणा की कि जसवंत सिंह की भाजपा की सदस्यता को ख़त्म कर दी गई है और उन्हें भाजपा से निकाल दिया गया है.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भातर भी जसवंत सिंह के साथ ख़ासी नाराज़गी थी.

भारतीय जनता पार्टी से निकाले जाने पर जसवंत सिंह ने दु:ख ज़ाहिर करते हुए कहा, "अफ़सोस है कि केवल एक किताब लिखने पर ही.....मुझे हनुमान से रावण बना दिया गया है....अच्छा होता यदि फ़ोन पर सूचित करने की जगह आडवाणी जी और राजनाथ जी मुझे व्यक्तिगत तौर पर इस फ़ैसले की सूचना दे देते."

भारत के वित्तमंत्री और विदेश मंत्री रह चुके जसवंत सिंह ने कहा कि उन्हें शिमला पहुंचने के बाद टेलीफ़ोन से पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने पार्टी से निकाले जाने की सूचना दी थी.

जसवंत सिंह पार्टी की चिंतन बैठक में शामिल होने के लिए शिमला पहुंचे थे लेकिन उन्हें बैठक में आने से मना कर दिया गया.

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