जसवंत के आडवाणी पर तीखे प्रहार

जसवंत सिंह
Image caption आडवाणी पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें कंधार प्रकरण के समय जो होने जा रहा है उसकी जानकारी नहीं थी

भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित होने के बाद जसवंत सिंह ने पार्टी की कई अंदरूनी बातों और घटनाओ की कलई खोल दी है. उन्होंने कहा कि 2002 में गुजरात में हुए दंगो के बाद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कार्रवाई होने से लाल कृष्ण आडवाणी ने रोक दिया था.

बकौल जसवंत सिंह आडवाणी ने कहा कि मोदी के ख़िलाफ कोई कदम उठाने से पार्टी में बवाल हो जाएगा. भारत के एक निजी टेलवीज़न चैनल एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में जसवंत सिह ने ये भी स्पष्ट किया कि अटल बिहारी वाजपेयी नरेंद्र मोदी के खिलाफ क़दम उठाना चाहते थे लेकिन उन्हें आडवाणी ने रोक लिया.

जसवंत सिंह ने वर्ष 1999 में भारतीय विमान आईसी-814 के अपहरण और तीन चरमपंथियों की रिहाई के सिलसिले में भी लालकृष्ण आडवाणी पर तीखे प्रहार किए हैं.

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई इस घटना के बारे में तब गृह मंत्री रहे लालकृष्ण आडवाणी कह चुके हैं कि उन्हें कंधार प्रकरण के दौरान चरमपंथियों की रिहाई के बारे में जानकारी नहीं थी.

जसवंत ने कहा है कि आडवाणी को ये जानकारी थी कि वे तीन चरमपंथियों को 166 विमान यात्रियों के बदले में कंधार ले जा रहे हैं.

इस साक्षात्कार में जब जसवंत सिंह से पूछा गया कि क्या आडवाणी को उनके कंधार जाने की जानकारी थी, तो उनका कहना था, "जी हाँ, उन्हें पता था."

उन्होंने माना कि उन्होंने इस बात को हाल में हुए चुनाव प्रचार के दौरान छिपाया था.

जसवंत सिंह का कहना था, "उन लोगों को जेल से, बिना गृह मंत्री की सहमति और दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर के, किस तरह से रिहा किया जा सकता है? मैंने ये छिपाने की कोशिश की...मैंने इसे अपनी वफ़ादारी और प्रतिबद्धता के तौर पर लिया.....यह एक चुनाव प्रचार का हिस्सा था...मैं क्या कहूँ...मैं सच्चाई के साथ कुछ किफ़ायत बरत रहा था."

उन्होंने कहा कि आडवाणी के इस बारे में जानकारी न होने के बयान से उन्हें बहुत दुख पहुँचा.

उनका कहना था, "मैंने कभी अपनी ज़िम्मेदारी किसी और के कंधों पर नहीं डाली...मैं कभी नहीं बोला...लेकिन बहुत दुख हुआ. मैं वहाँ किसी नाइट क्लब में नहीं जा रहा था. मैं इसलिए जा रहा था क्योंकि 166 यात्रियों की ज़िंदगी का सवाल था. जब मैंने आडवाणी जी से पूछा कि मैं क्या कहूँ, तो उनका कहना था - जो भी आप कहना चाहें, कह दें."

पिछले दिनो उनकी नई किताब जिन्ना - इंडिया, पार्टिशन,इंडिपेंडेस मे मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ करने और वल्लभ भाई पटेल को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार बताए जाने के आरोप मे उन्हें शिमला मे पार्टी की चिंतन बैठक शुरू होने के साथ ही निष्कासित कर दिया गया था. बीजेपी पार्टी का कहना था कि जिन्ना और पटेल पर उनके विचार पार्टी की विचारधारा से मेल नही खाते हैं और ये लेखनी अनुशासनहीनता की श्रेणी मे आती है.

निष्कासित होने के बाद जसवंत सिंह ने साफ कहा कि वे इस फैसले से दुखी है लेकिन कोई अपील दायर नही करेंगे और ना ही ये घटना उनके राजनीतिक जीवन का अंत है.

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