दिमाग़ी बुखार से 200 की मौत

भारत में अधिकारी स्वाइन फ़्लू से बचाव में लगे हैं, लेकिन दिमाग़ी बुखार क़हर ज़्यादा बड़ा साबित हो रहा है. उत्तर भारत में दिमाग़ी बुखार के कारण बड़ी संख्या में बच्चे अपनी जान गँवा रहे हैं.

Image caption कई बच्चों को लखनऊ में भर्ती कराया गया है

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक़ पिछले 24 घंटों को दौरान इस बुखार से 10 और बच्चों की मौत हो गई.

पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में 12 और लोगों को दिमाग़ी बुखार के कारण बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

गोरखपुर से सटे बिहार के इलाक़ों और नेपाल से भी लोग इलाज के लिए यहाँ आते हैं. इस समय गोरखपुर में क़रीब 125 बच्चों का इलाज चल रहा है.

इस साल दिमाग़ी बुखार से पीड़ित क़रीब 900 बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 200 बच्चों की मौत हो गई.

डॉक्टरों का कहना है कि जो बच्चे बच गए हैं, उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि इस बीमारी का गहरा असर होता है. दिमाग़ी बुखार से मरने वाले ज़्यादातर बच्चे ग़रीब परिवार से हैं.

स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी

सरकार ने गोरखपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी के लिए पिछले साल छह करोड़ रुपए देने की बात कही थी. क्योंकि गोरखपुर इस बीमारी का केंद्र है.

लेकिन डॉक्टरों और नर्सों की कमी के कारण इतनी बड़ी संख्या में मरीज़ों के इलाज में समस्या आ रही है.

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल प्रोफ़ेसर राजेश सक्सेना ने बताया कि अतिरिक्त डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की कोशिशें चल रही हैं.

राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि दिमाग़ी बुखार के ज़्यादातर मामले पूर्वी उत्तर प्रदेश के 14 ज़िलों से आ रहे हैं, जो हिमालय की तराई में हैं.

वर्ष 2005 में गोरखपुर में इस बीमारी से 1500 बच्चे मारे गए थे. इसके बाद नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी ने यहाँ अपनी एक इकाई स्थापित की.

प्रभाव

अधिकारियों का कहना है कि इस साल कम से कम 40 बच्चों में जापानी इंसेफ़्लाइटिस के वायरस पाए गए हैं.

लखनऊ मेडिकल कॉलेज में जापानी इंसेफ़्लाइटिस के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर रश्मि कुमार का कहना है कि इस साल दिमाग़ी बुखार के वायरस का असर बहुत तगड़ा है.

उनका कहना है कि एक या दो दिनों में ही बच्चों की स्थिति काफ़ी गंभीर हो जा रही है.

वर्ष 2005 में व्यापक स्तर पर फैले दिमाग़ी बुखार के बाद 30 ज़िलों में टीकाकरण अभियान चलाया गया. लेकिन अब इसे अन्य टीकाकरण अभियान के साथ जोड़ दिया गया है.

जनता के शोर-शराबे के बाद सरकार ने चीन से टीके का आयात किया. बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान भी शुरू हुआ.

लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इस वर्ष टीकाकरण अभियान का दायरा संतोषजनक नहीं रहा है.

दिमाग़ी बुखारे से पीड़ित एक बच्चे की माँ किरण ने इसकी पुष्टि की कि उनके इलाक़े में कोई टीकाकरण नहीं हुआ है.

पूर्वी उत्तर प्रदेश पिछले 30 वर्षों से दिमाग़ी बुखार से प्रभावित रहा है और अब तक यहाँ क़रीब 10 हज़ार बच्चों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है.

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