कचरे के मामले में दिल्ली नंबर वन

कचरा
Image caption ठोस कचरे को बिना निष्पादित किए ऐसे ही फेंक दिया जाता है.

उद्योग और वाणिज्य संगठन फ़िक्की के एक अध्ययन के मुताबिक भारत के सभी शहरों में दिल्ली सबसे ज़्यादा ठोस कचरा पैदा करता है.

मुंबई इस मामले में दूसरे पायदान पर है.

सबसे बड़ी चिंता ये है कि ठोस कचरे को ठिकाना लगाने का तरीका बहुत ही पुराना है जिससे गंदगी और प्रदूषण और बढ़ने का ख़तरा है.

फ़िक्की ने देश के 22 शहरों के सर्वेक्षण के बाद यह निष्कर्ष निकाला है.

इसके अनुसार दिल्ली में हर दिन छह हज़ार 800 टन ठोस कचरा पैदा होता जबकि मुंबई में यह मात्रा छह हज़ार 500 टन है.

सर्वेक्षण में कहा गया है कि कचरा प्रबंधन की वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं होने के कारण ये शहर इस कचरे को जमीन पर ही इधर उधर डाल रहे हैं.

इसमें कहा गया है कि मुंबई में पूरे का पूरा यानी 100 प्रतिशत ठोस कचरा शहर के ही किसी कोने में ज़मीन पर फेंक दिया जाता है.

दिल्ली में यह मात्रा 94 प्रतिशत है.

कचरे को ऊर्जा में बदलें

Image caption 17 शहरों ने तकनीकी मदद मिलने पर कचरे से ऊर्जा पैदा करने की इच्छा जताई है.

फ़िक्की ने निजी क्षेत्र से अपील की है कि वे कचरा निष्पादन में आगे आएँ और ठोस कचरे से ऊर्जा पैदा करने की तकनीक का इस्तेमाल करें.

फ़िक्की का कहना है कि जहां कचरा फेंका जाता है वहां भारी मात्रा में गैस निकलती है जिसे बिजली परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

जिन 22 शहरों का सर्वेक्षण किया गया उनमें से 75 फ़ीसदी ठोस कचरा बिना उसे निष्पादित किए ऐसे ही फेंक देते हैं. दिल्ली और मुंबई के अलावा जयपुर, लखनऊ, लुधियाना, पुणे और सूरत की स्थिति भी ठीक नहीं है.

एक अनुमान के मुताबिक एक टन ठोस कचरे से 55 घन मीटर गैस पैदा होती है और 12 हज़ार घन मीटर गैस से एक मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है.

सर्वेक्षण के मुताबिक 15 शहरों ने स्वीकार किया है कि अगर उन्हें तकनीकी मदद दी जाए तो वे कचरे से ऊर्जा पैदा करने की योजनाएँ शुरू करने को तैयार हैं.

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