आरएसएस का भाजपा में हस्तक्षेप से इनकार

अरुण शौरी
Image caption अरुण शौरी ने भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने स्पष्ट किया है कि यह उसका काम नहीं है कि वह भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करे.

दिल्ली में मीडिया से बातचीत में आरएसएस की राष्ट्रीय समिति के सदस्य राम माधव ने कहा कि संघ एक सांस्कृतिक संगठन है और उसकी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है.

राम माधव ने कहा कि संघ की भूमिका भाजपा को सलाह देने तक ही सीमित है.

उनका कहना था कि संघ के कई सदस्य पहले से भाजपा में काम कर रहे हैं और जब कभी भाजपा को ज़रुरत महसूस हो तो वो संघ से सलाह ले सकती है.

उन्होंने आरएसएस के पूर्व प्रमुख केएस सुदर्शन के जिन्ना को राष्ट्रवादी बताने संबंधी बयान पर कहा कि उनकी बात को सही संदर्भ में पेश नहीं किया गया है.

ग़ौरतलब है कि सोमवार को भाजपा नेता अरुण शौरी ने आएसएस से भाजपा की कमान अपने हाथ में लेने का अनुरोध किया था.

ख़बरें हैं कि भाजपा अध्यक्ष मंगलवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाक़ात कर सकते हैं.

एक निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत में नाराज़ दिख रहे पूर्व विनिवेश मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार रहे अरुण शौरी ने पार्टी को 'कटी पतंग' तक कह डाला.

उन्होंने पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भी नहीं छोड़ा और कहा कि वे 'एलिस इन ब्लंडरलैंड' हैं यानी राजनाथ सिंह ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहाँ बार-बार ग़लतियाँ हो रही हैं.

संघ से शौरी की अपील

अरुण शौरी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपील की कि वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को हटाकर पार्टी की कमान अपने हाथों में ले ले.

उन्होंने कहा, "मेरे विचार में भारतीय जनता पार्टी एक कटी पतंग की तरह है. इसे तुरंत संभालने की ज़रूरत है. मैं नहीं समझता कि पार्टी के अंदर ऐसा कोई है, जो ये काम कर सकता है. सिर्फ़ आरएसएस ये काम कर सकती है."

चुनाव नतीजों के बाद यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और अरुण शौरी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा था और हार की ज़िम्मेदारी लेने की बात कही थी.

हाल में पार्टी की अंदरुनी तनातनी खुल कर सामने आ गई है.

अपनी किताब में मोहम्मद अली जिन्ना को महिमामंडित करने का आरोप लगाते हुए पार्टी ने जसवंत सिंह को निष्कासित कर दिया था.

तो दूसरी ओर राजस्थान में पार्टी की विधायक दल की नेता पद से वसुंधरा राजे को हटाए जाने के मामले को लेकर भी भाजपा की किरकिरी हुई है.

हाल ही में लालकृष्ण आडवाणी के क़रीबी माने जाने वाले सुधींद्र कुलकर्णी ने भी पार्टी से नाता तोड़ लिया था.

जानकारों का कहना है कि वरिष्ठ नेता अरुण शौरी का पार्टी के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने से पार्टी की छवि को और नुक़सान पहुँचेगा.

बीबीसी के साथ बातचीत में पार्टी उपाध्यक्ष मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा, "इन सब घटनाओं से पार्टी और मज़बूत होकर निकलेगी. इससे पार्टी पर कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला है."

हालाँकि उन्होंने माना कि पार्टी संक्रमण काल से गुज़र रही है और पार्टी को एकजुट रहने की आवश्यकता है.

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