वसुंधरा ने बुलाई विधायक दल की बैठक

  • 26 अगस्त 2009
वसुंधरा राजे सिंधिया
Image caption वसुंधरा राजे ने इस्तीफ़े के लिए पार्टी आलाकमान के सामने शर्तें रखी हैं

राजस्थान में भाजपा की अंदरूनी कलह कम होने का नाम नहीं ले रही है और साफ़ दिख रहा है कि भाजपा आलाकमान और वसुंधरा राजे के बीच उठे विवाद का कोई समाधान नहीं निकला है.

वसुंधरा राजे पिछले दिनों शक्ति प्रदर्शन करते हुए दिल्ली गई थीं लेकिन वहाँ बात नहीं बनी तो वे मंगलवार को जयपुर लौट आईं.

अब उन्होंने बुधवार को विधायक दल की जयपुर में बैठक बुलाई है और सबकी नज़रें इस बैठक पर लगी हुई हैं.

भाजपा नेतृत्व ने राजस्थान में पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार का हवाला देते हुए वसुंधरा राजे को प्रतिपक्ष का नेता पद छोड़ने की हिदायत दी थी. मगर वसुंधरा राजे और उनके समर्थकों ने विधायक दल में अपने भारी बहुमत की दुहाई दी और पद छोड़ने से इनकार कर दिया.

इस बीच भाजपा ने वसुंधरा राजे के दो वफ़ादार विधायकों - राजेंद्र राठौर और ज्ञानदेव आहूजा को निलंबत कर दिया गया.

इसके बाद वसुंधरा राजे और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के बीच विवाद इतना बढ़ा कि वसुंधरा राजे के हिमायती विधायकों ने दिल्ली में जाकर अपनी ताक़त का प्रदर्शन किया.

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दलबल के साथ वहाँ एलके आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के सम्मुख अपना पक्ष रखा. लेकिन बात नहीं बनी.

शर्तें

सूत्रों के मुताबिक़ राजे ने पार्टी आलाकमान के सामने अपने इस्तीफ़े के साथ कुछ शर्तें भी रखी हैं.

इसमें विधायक दल का नया नेता उनकी इच्छा से बनाने, पार्टी के दो निलंबित विधायकों को तुंरत बहाल करने और राज्य की राजनीति से उन्हें जोड़े रखने की शर्तें रखीं.

मगर पार्टी नेता अभी इन शर्तों को मानने को तैयार नहीं हैं.

इस दौरान वसुंधरा राजे ने बुधवार को जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई है.

उनके समर्थक कहते हैं कि ये बैठक दरसल विधानसभा सत्र की तैयारी के लिए है. सत्र 27 अगस्त से शुरु हो रहा है.

मगर पार्टी सूत्रों के मुताबिक़ इसमें वसुंधरा राजे दिल्ली में बैठे भाजपा नेताओं को विधायक दल में अपने ताक़त की झांकी दिखाना चाहती हैं.

वसुंधरा राजे के समर्थक विधायक दिल्ली से उनके खाली हाथ लौटने से निराश ज़रूर हैं. मगर वे कहते हैं कि वसुंधरा राजे अब भी सबसे प्रभावी नेता हैं और राजस्थान में कोई भी नेता उनका मुक़ाबला नहीं कर सकता.

वसुंधरा राजे के समर्थक पूर्व मंत्री दिगंबर सिंह कहते हैं, "पार्टी के नेता इस विवाद का कोई सम्मानजनक हल निकल लेंगे."

उधर वसुंधरा राजे के विरोधी उनके त्यागपत्र की मांग पर अड़े हुए हैं.

पार्टी में ये अंतर्कलह ऐसे समय शुरु हुई है जब भाजपा ने राज्य में सदस्यता अभियान शुरु कर अपना आधार पुख्ता करने का काम हाथ में लिया है.

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