और अब खंडूरी की बात

भुवन चंद्र खंडूरी
Image caption भुवन चंद खंडूरी को भाजपा ने आम चुनाव 2009 के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था

भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सेवानिवृत्त मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी ने पार्टी में चल रही अंतर्कलह पर असंतोष और नाराजगी ज़ाहिर करते हुए हाईकमान को एक पत्र लिखा है.

उनका कहना है कि पार्टी के मौजूदा संकट से देशभर में कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है और पार्टी लाचार और कमजोर नज़र आ रही है.

हालाँकि भुवन चंद खंडूरी ने चिठ्ठी का ब्यौरा नहीं दिया लेकिन बीबीसी से बातचीत में उन्होंने अरूण शौरी की तारीफ़ की.

उनके पूरे हाव-भाव से भी लगता है कि भाजपा की अंतर्कलह थमनेवाली नहीं और आनेवाले दिनों में भाजपा को कुछ और मुखर विरोध का सामना करना पड़ सकता है.

ऐसा लगता है कि भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी के नज़दीकी रहे लोग एक-एक करके आवाज़ बुलंद कर रहे हैं. कहने को तो खंडूरी उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं लेकिन वाजपेयी सरकार के सबसे चमकदार चेहरों में से एक थे.

खंडूरी ने माना कि भाजपा में समस्या है, “पिछले 18 वर्षों से मैं भाजपा में सक्रिय हूँ. पहले भाजपा की एक अनुशासित पार्टी के रूप में अच्छी छवि थी, अच्छे संस्कार थे लेकिन वर्त्तमान में पार्टी में जो माहौल बना है वो पार्टी के हित में नहीं है, उससे पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ता चिंतित हैं और उनका मनोबल गिरा है, पार्टी की फिर से वही छवि बननी चाहिए जो 90 के दशक में थी.”

उन्होंने कहा, “भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका है और जब हमारे यहाँ दो ही मुख्य पार्टियां हैं और इनमें कोई भी पार्टी इतनी कमजोर होती है कि वो अपनी भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर नहीं निभा सकती तो ये अच्छा नहीं है.”

हार की जि़म्मेदारी!

लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड में भाजपा की करारी हार हुई थी और राज्य की पाँचों संसदीय सीट कांग्रेस के खाते में चली गई थीं. खंडूरी को इस हार का ज़िम्मेदार ठहराते हुए केंद्रीय नेतुत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था और काफी खींचतान के बाद राज्य की बागडोर रमेश पोखरियाल निशंक को सौप दी गई थी.

अरूण शौरी के जिस बयान पर भाजपा में घमासान मचा है उसमें उन्होंने खंडूरी को हटाने के पार्टी के फ़ैसले को ग़लत क़रार दिया. खंडूरी ने अरूण शौरी के इस बयान पर टिप्पणी करने से तो इनकार कर दिया लेकिन अरूण शौरी की भूरि-भूरि प्रशंसा भी की.

उनका कहना था कि अरुण शौरी एक प्रखर बुद्धिजीवी हैं, वरिष्ठ नेता हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका सम्मान है. जब उन्होंने अपनी राय दी है तो मैं और क्या कह सकता हूँ.”

यह पूछे जाने पर कि भाजपा के संकट के लिए ज़िम्मेदार कौन है उनका कहना था, “लोकसभा चुनाव के नतीजों का पार्टी पर ऐसा प्रभाव पड़ा जो नहीं होना चाहिए था. हमें कम सीटें मिलीं लेकिन ऐसा नहीं था कि हमारा सूपड़ा साफ़ हो गया था. हमारी सीटें अब भी 116 है. लेकिन निराशा का ऐसा वातावरण छा गया जो नहीं होना चाहिए था. हम पार्टी के रूप में ख़त्म नहीं हो गए थे और इसके बाद एक-एक करके कार्रवाई तो होती रही.”

और इसका शिकार आप भी हुए? यह पूछे जाने पर खंडूरी का कहना था, “इस पर मंथन करना चाहिए था. हार के बाद एक-एक करके राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की गई और मेरे ऊपर भी हुई.”

क्या इससे पार्टी कमजोर हुई है? इस सवाल पर खंडूरी का कहना था, "उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदले जाने का प्रभाव तो पड़ा है और लोग इसकी चर्चा भी करते हैं."

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