आडवाणी पर सफ़ाई देने का दबाव

लालकृष्ण आडवाणी
Image caption लालकृष्ण आडवाणी अपनी किताब में लिख चुके हैं कि उन्हें वर्ष 1999 में कंधार में आतंकवादियों को रिहा किए जाने की जानकारी नहीं थी

एनडीए सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्रा ने कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी जानते थे कि कंधार में अपहृत विमान आईसी 814 को छुड़ाने के लिए तीन 'आतंकवादियों' को रिहा किया जा रहा है और तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह उन्हें अपने साथ लेकर जा रहे हैं.

इसके बाद उसी सरकार में वित्तमंत्री रहे यशवंत सिंह ने भी कहा है कि जो कुछ ब्रजेश मिश्रा कह रहे हैं वह सच है.

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी से निकाले जाने के बाद वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह कह चुके हैं कि यह पूरा मामला उनकी जानकारी में था और इस निर्णय में उनकी सहमति शामिल थी.

उल्लेखनीय है कि लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी किताब 'माई कंट्री -माई लाइफ़' में लिखा है कि कंधार में अपहृत विमान और यात्रियों को छुड़ाने के लिए तीन आतंकवादियों को रिहा करने और जसवंत सिंह के कंधार जाने का फ़ैसला उनकी जानकारी में नहीं था.

बाद में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि वे नहीं कह सकते कि जसवंत सिंह के कंधार जाने का फ़ैसला क्यों लिया गया था.

विश्लेषकों का कहना है कि इन बयानों के बाद लालकृष्ण आडवाणी पर दबाव बढ़ गया है कि वे इस पर सफ़ाई दें कि कंधार प्रकरण की जानकारी वास्तव में उन्हें थी या नहीं.

'सर्वसम्मत फ़ैसला था'

ब्रजेश मिश्रा ने एक टेलीविज़न कार्यक्रम के लिए दिए गए साक्षात्कार में कहा है कि कंधार में अपहृत विमान और यात्रियों को छुड़ाने के लिए 'तीन आतंकवादियों को छोड़ने का फ़ैसला' सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति (सीसीएस) में लिया गया था.

उनका कहना है कि इसी में यह फ़ैसला भी लिया गया था कि 'आतंकवादियों' को लेकर तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह जाएँगे.

पूर्व सुरक्षा सलाहकार का कहना है कि सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति में प्रधानमंत्री के अलावा गृहमंत्री, रक्षामंत्री, वित्तमंत्री, और विदेश मंत्री होते हैं और गृहमंत्री होने के नाते लालकृष्ण आडवाणी उस बैठक के सदस्य थे.

उनका कहना है, "कंधार में अपहरणकर्ताओं ने पहले 36 आतंकवादियों को छोड़ने, 20 करोड़ डॉलर की राशि देने और कश्मीर में दफ़नाए गए कुछ आतंकवादियों के अवशेषों की माँग रखी थी लेकिन जब आख़िर में वे तीन आतंकवादियों को रिहा कहने की बात पर आ गए."

ब्रजेश मिश्रा का कहना है कि वहाँ अपहरणकर्ताओं से वार्ता में लगे अधिकारियों का कहना था कि आतंकवादियों के साथ सरकार के किसी वरिष्ठ सदस्य को आना चाहिए जो अंतिम समय के किसी घटनाक्रम में निर्णय लेने में सक्षम हो, तब जसवंत सिंह ने कहा कि वे साथ में जाएँगे.

उन्होंने कहा कि इसके बाद सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति में एक प्रस्ताव रखा गया जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया.

पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को इस बात की जानकारी होने के सवाल पर उनका कहना था कि इस बात की पुष्टि उस बैठक में मौजूद तीन व्यक्ति कर चुके हैं, पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस, पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह और पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा कर चुके हैं.

'सच सामने आए'

Image caption यशवंत सिन्हा इन दिनों पार्टी आलाकमान के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हुए हैं

यशवंत सिन्हा ने गुरुवार को समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, "जो ब्रजेश मिश्रा कह रहे हैं, उससे मैं पूरी तरह सहमत हूँ कि लालकृष्ण आडवाणी उस पूरे घटनाक्रम से पूरी तरह से वाकिफ़ थे."

उनका कहना है, "वह एक सर्वसम्मत निर्णय था और हम सब उसमें भागीदार थे."

हाल के दिनों में अपने बाग़ी तेवरों की वजह से पार्टी के हाशिए पर जा पहुँचे यशवंत सिन्हा ने कहा कि सच सामने आना चाहिए क्योंकि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है.

जबकि जसवंत सिंह ने आज फिर दोहराया कि कंधार मामले की पूरी जानकारी लालकृष्ण आडवाणी को थी.

उन्होंने कहा, "जिन तीन आतंकवादियों को रिहा किया गया वे देश के गृहमंत्री के हस्ताक्षर के बिना रिहा किए ही नहीं जा सकते थे.ऐसे में वे कैसे कह सकते हैं कि इस बात की जानकारी उन्हें नहीं थी."

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