संपत्ति को सार्वजनिक करेंगे जज

  • 27 अगस्त 2009
सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट के जजों ने काफ़ी चर्चा के बाद अपनी संपत्ति को सार्वजनिक करने का फ़ैसला किया

ख़बरों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों ने बुधवार को अपनी संपत्तियों को सार्वजनिक करने का फ़ैसला किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता में दो घंटे से अधिक चली बैठक में सैद्धांतिक निर्णय किया गया कि जजों की संपत्तियों का विवरण सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा.

हालांकि इसके लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है.

सुप्रीम कोर्ट में विशेष तौर पर हाई कोर्ट के जजों और उनके परिवार के सदस्यों का विवरण सार्वजनिक करने को लेकर बहस के बाद यह निर्णय हुआ है.

सूचना के अधिकार के लागू होने के बाद से इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई थी.

भारत में जजों की संपत्ति को सार्वजनिक करने संबंधी कोई क़ानून नहीं है. हालांकि इस संबंध में एक विधेयक संसद में विचाराधीन है.

सुप्रीम कोर्ट के जज परंपरा के तहत मुख्य न्यायाधीश को ब्योरा देते हैं लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जाता.

हाल में जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद संपत्ति को सार्वजनिक करने की मांग ने जोर पकड़ा था.

उल्लेखनीय है कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में 23 जज और विभिन्न हाई कोर्ट में लगभग 654 जज कार्य कर रहे हैं.

दबाव

ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही थी कि ब्योरा सार्वजनिक करने से जजों पर कई तरह के दबाव पड़ सकते हैं, उनसे आमदनी का ब्यौरा पूछा जा सकता है और उन्हें बेवजह मुक़दमों में उलझाया जा सकता है.

केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने बुधवार को संपत्ति घोषणा मामले में मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के रुख़ पर सहमति जताई और कहा कि यदि जज स्वैच्छिक रूप से अपनी संपत्ति घोषित करना चाहते हैं तो यह उनकी इच्छा है.

मीडिया से बातचीत में इस निर्णय का वरिष्ठ अधिवक्ताओं सोली सोराबजी और प्रशांत भूषण ने स्वागत किया. वे इस मुद्दे पर अभियान छेड़े हुए थे. सोराबजी ने कहा कि यह सही दिशा में किया गया निर्णय है.

उल्लेखनीय है कि संपत्ति घोषणा के मुद्दे ने भारी बवाल उठ खड़ा हुआ था.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश एमके कण्णन और कर्नाटक हाईकोर्ट के जज डीवी शैलेंद्र कुमार ने अपनी संपत्तियों की घोषणा कर दी थी जबकि मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति के चंद्रू ने ऐसा करने की मंशा जताई थी.

कुछ दिन पहले मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि जज अपनी संपत्तियों को सार्वजनिक करने के लिए स्वतंत्र हैं और कुछ भी ऐसा नहीं है, जो उन्हें इससे रोकता हो.

कर्नाटक हाई कोर्ट के जज डीवी शैलेंद्र कुमार ने तो सभी जजों की तरफ से बोलने के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन के अधिकार पर ही सवाल उठा दिया था.

इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायाधीश 'प्रचार के भूखे' हैं.

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