'जनसंघ बंटवारे का समर्थक'

प्रणव मुखर्जी
Image caption प्रणव मुखर्जी ने जनसंघ को बंटवारे का समर्थक बताया है.

भारतीय जनता पार्टी जिन्ना प्रकरण के बाद अपने घर के झगड़े से निपट सके उसके पहले ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने उनके ज़ख्मों पर एक तरह से नमक छिड़कते हुए जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुकर्जी को देश के बंटवारे का समर्थक बताया है.

एक समाचार एजेंसी और एक अंग्रेज़ी अख़बार के साथ बातचीत में प्रणव मुखर्जी ने जसवंत सिंह की किताब पर भी निशाना लगाया है और कहा है कि नेहरू को बंटवारे के लिए ज़िम्मेदार ठहराना दलीय हित के लिए इतिहास को तोड़ने मरोड़ने की तरह है.

मुखर्जी ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुकर्जी ने न सिर्फ़ बंटवारे के हक़ में थे बल्कि बंगाल और पंजाब के विभाजन में भी उनकी भूमिका थी.

उनका आरोप है कि मुकर्जी ने ये प्रस्ताव रखा था कि बंटवारे का आधार केवल मुस्लिम बहुल या हिंदू बहुल राज्यों को नहीं बनाया जाए, इसे ज़िलों तक बढ़ाया जाए.

यानि अगर एक राज्य में ही कुछ ज़िलों में मुसलमान ज़्यादा हों तो वो पाकिस्तान का हिस्सा बने और हिंदू ज़्यादा हों तो वो भारत का हिस्सा बने.

प्रणव मुखर्जी का आरोप है कि इसी तरह से पंजाब और बंगाल का विभाजन हुआ, असम का सिलहट ज़िला पाकिस्तान और वर्तमान बांग्लादेश का हिस्सा बना.

उनका कहना था: “अगर वो अपने ही सिद्धांतों को भूलना चाहते हैं तो फिर भगवान ही उन्हें बचाए.’’

उन्होंने आडवाणी और जसवंत सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी के नेताओं को समझाना होगा कि जिन्ना के गुणगान के पीछे उनकी मंशा क्या है.

उन्होंने कहा: “इस तरह की बातों से नेहरू पर कीचड़ उछालने की कोशिश हो रही है.’’

भारतीय जनता पार्टी ने फ़िलहाल इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन अपने घर के आग को बुझाने में जुटी पार्टी कांग्रेस के इस हमले से कैसे निपटती है ये देखने वाली बात होगी.

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