स्थिति स्पष्ट कर सकता है संघ

मोहन भागवत
Image caption आरएसएस के बारे में माना जाता है कि वो भाजपा की दिशा तय करती है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत आज भारतीय जनता पार्टी में बढ़ते अंदरुनी कलह के बारे में स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं.

पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने अध्यक्ष राजनाथ सिंह और संसद में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी को आलोचना का निशाना बनाया है जिसके बाद राजनाथ सिंह ने गुरुवार को आरएसएस प्रमुख से मुलाक़ात की.

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से पहले बुधवार को भाजपा के एक और वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी संघ प्रमुख से मुलाक़ात की थी.

संघ ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रमुख मोहन भागवतत आज एक प्रेस कांफ्रेंस करने वाले हैं. माना जा रहा है कि प्रेस कांफ्रेस में भाजपा के अंदरुनी कलह पर कोई बयान दे सकते हैं.

राजनाथ सिंह और मोहन भागवत की मुलाक़ात के दौरान विभिन्न नेताओं ख़ासकर पार्टी के बारे में अरुण शौरी के बयान और उसके बाद आडवाणी के बारे में यशवंत सिन्हा के बयानों पर भी चर्चा हुई है.

इससे पहले जिन्ना पर जसवंत सिंह की किताब ने भी तूल पकड़ा था जिसके बाद उन्हें पार्टी से निकाला गया था.

इनकार

भाजपा में पिछले कई महीनों से अंदरुनी कलह का माहौल है. राजस्थान में विपक्ष की नेता वसुंधरा राजे ने पद से इस्तीफ़ा देने का आलाकमान का निर्णय मानने से लगभग इनकार कर दिया है.

दूसरी ओर जसवंत सिंह को पार्टी से निकाले जाने के बाद अरुण शौरी ने एक इंटरव्यू में कहा कि पार्टी की हालत कटी पतंग जैसी है और इसे ठीक करने के लिए संघ को क़दम उठाने होंगे.

बात यहीं पर नहीं रुकी. कुछ समय पहले उत्तरांचल में पार्टी की हार के लिए ज़िम्मेदार ठहरा कर मुख्यमंत्री पद से हटाए गए वरिष्ठ नेता खंडूरी ने पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखकर कारण जानने की मांग की.

इसके बाद गुरुवार को पूर्व राजग सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा ने कहा कि कंधार में तीन चरमपंथियों को ले जाने के फ़ैसले में लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल थे.

पूर्व वित्त मंत्री और पार्टी नेता यशवंत सिन्हा ने ब्रजेश मिश्रा के बयान का समर्थन किया और कहा कि आडवाणी को इस मामले में सच्चाई बतानी चाहिए.

आडवाणी ये कहते रहे हैं कि उन्हें इस फ़ैसले की जानकारी नहीं थी.

पिछले कुछ महीनों की परिस्थितियों को देखते हुए मोहन भागवत की प्रेस कांफ्रेंस अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कुछ दिन पहले कुछ अख़बारों और चैनलों के साथ बातचीत में मोहन भागवत ने भी पार्टी के कार्यकलाप से बहुत खुशी ज़ाहिर नहीं की थी.

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