किताब पर पाबंदी को चुनौती

  • 28 अगस्त 2009

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नेता जसवंत सिंह ने गुजरात में उनकी किताब पर लगाई गई पाबंदी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

Image caption जसवंत सिंह को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया है

गुजरात सरकार ने राज्य में जसवंत सिंह की मोहम्मद अली जिन्ना पर आई नई किताब की बिक्री पर रोक लगा दी थी. जिस पर जसवंत सिंह ने दुख व्यक्त किया था.

इसी के तहत शुक्रवार को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें किताब पर लगाई गई पाबंदी को चुनौती दी गई है.

राज्य सरकार का कहना था कि उसने किताब पर इसलिए प्रतिबंध लगाया है क्योंकि उस किताब में भारत के पहले गृह मंत्री वल्लभ भाई पटेल पर अपमानजनक टिपण्णियाँ की गई हैं.

गुजरात सरकार का कहना था कि वल्लभ भाई पटेल राज्य के लिए बडे क़द के नेता थे और उन्हें भारत के लौह पुरुष के नाम से भी जाना जाता है. पटेल ने देश की आज़ादी और राज्यों के एकीकरण में अहम भूमिका निभाई.

निराशा

गुजरात में किताब पर पाबंदी के फ़ैसले पर जसवंत सिंह ने निराशा प्रकट करते हुए कहा था कि किताबों पर प्रतिबंध लगाना विचारों पर रोक लगाना है.

जसवंत सिंह ने अपनी नई किताब जिन्ना: इंडिया,पार्टिशन, इंडिपेंडेंस में पंडित जवाहर लाल नेहरू को विभाजन के लिए ज़िम्मेदार बताया था और कहा था कि देश के भविष्य और विभाजन को लेकर वल्लभ भाई पटेल की सोच सच्चाई से दूर थी.

जसवंत सिंह की किताब आते ही भाजपा ने अपने आप को उससे अलग कर लिया था और कहा था ये जसवंत सिंह के विचार है जिससे पार्टी का कोई लेना देना नहीं है. बाद में उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया गया.

गुजरात में प्रतिबंध के बावजूद ये किताब भारत और पाकिस्तान में ख़ूब बिक रही है.

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