इसलिए नहीं पढ़ा पुत्री ने अर्थशास्त्र

उपेंदर सिंह
Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी उपिंदर सिंह इतिहास की प्रोफेसर हैं

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पुत्री उपिंदर सिंह को गणित से डर लगता था इसलिए उन्होंने अर्थशास्त्र नहीं पढ़ा.

इससे उनके अर्थशास्त्री पिता मनमोहन सिंह थोड़े नाराज़ ज़रूर हुए. लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों पर अर्थशास्त्र पढ़ने के लिए दबाव नहीं डाला.

उपिंदर ने खुद इस बात का स्पष्ट किया. वे अपनी पुस्तक ‘ए हिस्ट्री आफ एनशिएंट एंड अर्ली मेडिएवल इंडिया’ के विमोचन के सिलसिले में शनिवार को कोलकाता में थीं.

लोकार्पण समारोह के बाद इस संवाददाता से बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘एक तेजतर्रार शिक्षाविद (मनमोहन सिंह) की पुत्री के तौर पर आगे पढ़ना-लिखना एक समस्या थी. इसकी वजह यह थी कि हमें पता था कि लोगों की उम्मीदें हम पर टिकी हैं और हमसे भी पिता की तरह बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.’

दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर उपिंदर ने कहा,'' मेरे पिता शायद इस बात को लेकर कुछ दुखी होंगे कि उनकी तीन पुत्रियों में से किसी ने भी अर्थशास्त्र की पढ़ाई नहीं की. लेकिन उन्होंने हम पर कभी अपनी इच्छी नहीं थोपी.''

पिता से प्रेरणा

वे कहती हैं कि ‘मेरे पिता जरूर चाहते होंगे कि कम से कम एक बेटी अर्थशास्त्र की पढ़ाई करे. लेकिन उन्होंने कभी न तो अपनी इच्छा थोपी और न ही हमारे फैसले पर निराशा जताई.’

क्या लेखन में आपको अपने पिता से प्रेरणा मिली, इस सवाल पर वे कहती हैं कि ‘मैंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं. वे अर्थशास्त्री हैं और मैं एक इतिहासकार. इसलिए किताब लिखते समय मुझे अपने पिता का ख्याल नहीं आता.’

उपिंदर कहती हैं कि यह ज़रूर है कि बचपन में मैंने उनके अध्ययन कक्ष में ढेर सारी पुस्तकें देखती थी. शायद इसी ने मेरे करियर को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई हो.

वे कहती हैं कि किसी बेहतर शैक्षणिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति की पुत्री होना बहुत मुश्किल है.

इसकी वजह यह है कि आपसे भी लोग वैसा ही उम्मीद करते हैं और आपको उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना होता है.

उपिंदर दसवीं की बोर्ड परीक्षा खत्म करने की केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल की योजना का समर्थन करते हुए कहती हैं,'' मेरे पुत्र ने हाल ही में 12वीं की परीक्षा दी है. मुझे लगातार दो बार बोर्ड की परीक्षाओं ( दसवीं और बारहवीं) में शामिल होने वाले छात्रों की मानसिक स्थिति के बारे में पता है.''

वे कहती हैं कि हमारे समय में हालात अलग थे. लेकिन अब हमारे बच्चों को उन कठिनाइयों का सामना नहीं करना चाहिए.

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