वसुंधरा दिल्ली जाने को तैयार

वसुंधरा राजे सिंधिया
Image caption वसुंधरा राजे को नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ने को कहा गया है

राजस्थान की पूर्वमुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा है कि वे दिल्ली जाकर पार्टी में उठे संकट पर बातचीत को तैयार हैं.

उन्होंने माना कि कुछ समस्या है मगर वे पार्टी की अनुशासित सिपाही हैं और पार्टी उनके लिए सर्वोपरि है.

उन्होंने यह नहीं बताया कि वो दिल्ली कब जाएँगीं, लेकिन कहा जब भी वरिष्ठ नेता मौजूद होंगे, वे दिल्ली जाकर बात करेंगीं.

प्रेक्षक इसे वसुंधरा राजे के रुख में नरमी का संकेत मान रहे हैं.

पार्टी ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद त्यागने को कह रखा है, मगर वसुंधरा राजे ने अब तक इस आदेश का पालन नहीं किया है.

इन खबरों के बीच कि वे दिल्ली जाने को तैयार नहीं हैं और इस्तीफा नहीं देंगीं, उन्होंने मीडिया से बातचीत की और कहा कि मीडिया का एक वर्ग ग़लत खबरें प्रचारित कर रहा है.

वसुंधरा राजे ने भाजपा और संघ की तारीफ की और अपनी माँ विजयाराजे सिंधिया की सेवाओं का हवाला दिया और कहा उस वक़्त से पार्टी और संघ से उनके गहरे रिश्ते हैं.

राजे ने कहा, "कुछ समस्या है तो बातचीत से हल कर ली जाएगी.ये कहना कि कोई समस्या नहीं है, मज़ाक ही होगा. लेकिन हर समस्या को बातचीत से हल किया जा सकता है."

उन्होंने कहा कि उनका विचार राज्य में धार्मिक सथलों के दौरे पर जाने का था मगर इस विवाद के कारण वो दौरे पर नहीं जा सकी हैं.

समझा जाता है कि राजे अगले दो दिनों में कभी दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व से बात कर सकती हैं.

इस्तीफ़े का दबाव

उल्लेखनीय है कि राज्य में भाजपा के ख़राब चुनावी प्रदर्शन के बाद पार्टी हाईकमान ने तत्कालीन पार्टी प्रमुख ओम माथुर, संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र और वसुंधरा राजे को उनके पदों से हट जाने का फरमान सुनाया था.

ओम माथुर और प्रकाश चंद्र तो पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं, मगर वसुंधरा राजे को इस्तीफ़े के लिए राज़ी करने में पार्टी का दम फूल गया है.

वसुंधरा राजे से इस्तीफ़ा मांगे जाने की ख़बर सार्वजनिक होते ही उनके समर्थक विधायक दिल्ली गए और अपनी ताक़त का प्रदर्शन किया.

वो इसका विरोध कर रहे हैं.

ख़ुद वसुंधरा राजे भी रोड शो करते हुए दिल्ली गईं मगर लालकृष्ण आडवाणी से हुई बातचीत का भी कोई नतीजा नहीं निकला और उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ा.

गुरुवार को उन्होंने विधानसभा सत्र के बहाने से एक बार फिर विधायक दल की बैठक बुलाई और यह संकेत दिया कि बहुमत अभी भी उनके साथ हैं.

वसुंधरा राजे के समर्थक विधायक लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसे में उनसे इस्तीफा माँगना लोकतंत्र की भावना का माखौल उड़ाना होगा.

प्रेक्षकों को लगता है आपसी लड़ाई में कमज़ोर पड़ते हाईकमान के लिए राजे जैसे क्षेत्रीय नेताओं से निबटना आसन नहीं होगा.

फिर जसवंत सिंह के भाजपा से बहार होने के बाद वसुंधरा राजे और ताक़तवर हुई हैं क्योंकि केंद्रीय स्तर पर उन्हें राजे का विरोधी समझा जाता था.

अभी पार्टी के सामने यह संकट बना हुआ है कि यदि वसुंधरा राजे इस्तीफ़ा दे भी देती हैं तो उनकी जगह किसे नेता बनाया जाएगा.

वसुंधरा राजे ने कहा है कि नया नेता उनकी पसंद का होना चाहिए लेकिन आलाकमान ने फ़िलहाल उनकी बात मानने के संकेत नहीं दिए हैं.

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है