बिहार के दो अस्पतालों में हड़ताल

  • 30 अगस्त 2009
दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल
Image caption बिहार के दोनों बड़े अस्पतालों में हड़ताल से लोगों को परेशानी हो रही है.

बिहार के दो बड़े सरकारी अस्पतालों में तीन दिन से डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ग़ैर सरकारी आँकड़ों के अनुसार 30 मरीज़ों की मौत हो गई है.

राज्य के दो बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) और दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) के सभी 800 जूनियर डॉक्टर 27 अगस्त से हड़ताल पर हैं.

स्टाइपेंड के बदले पूरा वेतनमान देने की मांग पर अड़े इन जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से दोनों अस्पतालों में चिकित्सा-व्यवस्था लगभग ठप हो गई है.

इस कारण इलाज के अभाव में ग़ैर सरकारी सूचनानुसार वहाँ चार दिनों में लगभग 30 मरीज़ों की मौत हो गई है.

हालाँकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि हड़ताल के कारण चिकित्सा के बिना ये सभी मौतें नहीं हुई हैं, बल्कि ऐसे बड़े अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार कुछ लोगों की मौतें हर रोज़ होती रहती हैं.

बिहार में सिर्फ़ दो यानी दरभंगा और पटना के ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) की पढ़ाई होती है.

यहीं के पीजी छात्र पीएमसीएच और डीएमसीएच में बतौर जूनियर डॉक्टर काम करते हैं. इन्हें 13 हज़ार से 15 हज़ार तक स्टाइपेंड मिलता है. पहले तो इन जूनियर डॉक्टरों ने राज्य सरकार से स्टाइपेंड बढाने की मांग की थी.

मांग

जब सरकार ने इनका स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हज़ार रुपए करने का निर्णय ले लिया, तब ये जूनियर डॉक्टर सरकारी मेडिकल अफ़सर की तरह पूरे वेतनमान के साथ तनख़्वाह देने की मांग लेकर हड़ताल पर चले गए.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव ने बीबीसी से कहा, "बिना कोई नोटिस दिए सीधे हड़ताल पर चले जाना और छात्र रहते हुए स्टाइपेंड के बजाय सरकारी नौकरी वाले वेतनमान की असंगत मांग पर अड़ जाना, जूनियर डॉक्टरों का सरासर ग़लत क़दम है. राज्य सरकार ने 25 हज़ार रुपए का जो स्टाइपेंड देना तय किया है उस से ज़्यादा अब कुछ भी संभव नहीं है. अगर यह नियम विरूद्ध और जनघाती हड़ताल जारी रही, तो सरकार को बाध्य होकर कड़े क़दम उठाने होंगे."

बिहार में पीएमसीएच गंभीर बीमारियों या दुर्घटनाओं में घायल लोगों के इलाज का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र है.

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल ने चार दिनों में ही इस अस्पताल को लगभग पंगु बना दिया है.

आपात चिकित्सा सेवा या ऑपरशन का काम यहाँ पूरी तरह ठप हो गया है.

यहाँ भर्ती मरीज अब दूसरे अस्पतालों में जा रहे हैं. सरकार ने बाहर के अस्पतालों से बुलाए गए डॉक्टरों को पीएमसीएच में तैनात करने और सीनियर डॉक्टरों को ड्यूटी पर ज़्यादा समय तक रखने का निर्देश दिया है.

इसके बावजूद इन दोनों बड़े अस्पतालों में चिकित्सा का काम जूनियर डॉक्टरों के बिना ठीक से चला पाना संभव नहीं लगता है.

उधर हड़ताली जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि राज्य सरकार और अस्पताल प्रशासन की तरफ से घोर उपेक्षा का शिकार होते आ रहे जूनियर डॉक्टर अब सही वेतनमान लिए बग़ैर काम पर नहीं लौटेंगे.

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