मुलाक़ातों के बाद इंतज़ार फ़ैसले का

  • 30 अगस्त 2009
बीजेपी नेता
Image caption बदलेगें ये चेहरे

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत के बीच मुलाक़ातों के दौर के बाद अब सबको इंतज़ार है फ़ैसले का.

रविवार की सुबह संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लाल कृष्ण आडवाणी के साथ उनके घर पर मुलाक़ात की है.

रविवार को ही संघ के वरिष्ठ अधिकारी मदनदास देवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि भाजपा का ये संकट ख़त्म होगा.

उनका कहना था, "हमें पूरा यकीन है कि भाजपा एकजुट रहेगी और इस संकट से और ताक़तवर होकर निकलेगी."

तो सवाल अब यही है कि क्या 'लौहपुरूष' आडवाणी पद से हटेंगे? क्या अध्यक्ष राजनाथ सिंह अपने कार्यकाल से पहले ही कुर्सी छोड़ने को राज़ी होंगे?

जानकारों का कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन में शायद ही कोई शक हो लेकिन सवाल उठता है कि इसका समय क्या होगा.

वरिष्ठ पत्रकार और टीकाकार प्रदीप कौशल का कहना है नेता प्रतिपक्ष के तौर पर और उनके क़द और मान सम्मान को देखते हुए ये फ़ैसला आडवाणी पर ही छोड़ दिया गया है कि वो कब ये फ़ैसला करना चाहते हैं.

उनका कहना है, "उनके सामने संघ ने शर्त बस ये रखी है कि आडवाणी स्वयं को अध्यक्ष पद से मुक्त करें और ये शर्त मान ली गई है."

वैसे आधिकारिक तौर पर नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने इनकार किया है कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है.

जावडेकर ने कहा, "ये सच है कि पार्टी संकट के दौर से गुज़र रही है. लेकिन नेतृत्व परिवर्तन पर कोई चर्चा नहीं है. पार्टी नेताओं और संघ प्रमुख के बीच मुलाक़ात में देश की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हुई."

कहा जा रहा है कि इसी परिवर्तन के लहर में राजनाथ सिंह को भी अपनी कुर्सी से हाथ धोना होगा.

नए चेहरे

प्रदीप कौशल का कहना है संभवत: राज्यस्तर से किसी नए चेहरे को लाया जाएगा अध्यक्ष पद के लिए लेकिन जहां तक नेता प्रतिपक्ष का सवाल है तो उसका चयन मौजूदा लोकसभा से ही होगा.

भाजपा में शुरू हुए अंतरकलह के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि वो भाजपा को बिना मांगे कोई सलाह नहीं देंगे.

भागवत की इस टिप्पणी के बाद से ही वरिष्ठ नेताओं और संघ प्रमुख के बीच मुलाक़ात का सिलसिला शुरू हो गया.

शुक्रवार शाम को अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, अनंत कुमार और वेंकैया नायडू जैसे कई शीर्ष नेताओं ने मोहन भागवत से मुलाक़ात की.

शनिवार को बारी थी लोकसभा में विपक्ष के नेता और पार्टी के अंदर और बाहर से आलोचना का सामना कर रहे लालकृष्ण आडवाणी की.

Image caption जेटली भी हैं दावेदार

हाल के दिनों में पार्टी के अंदर और बाहर से लालकृष्ण आडवाणी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है.

पार्टी से निकाले जाने के बाद तो जसवंत सिंह ने आडवाणी के ख़िलाफ़ मोर्चा ही खोला हुआ है, जबकि अरुण शौरी ने भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा था.

कंधार मामले में जानकारी होने के सवाल पर पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा भी अपना मुँह खोल चुके हैं और आडवाणी पर सवाल उठा चुके हैं.

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