वाम दलों का शक्ति प्रदर्शन

  • 31 अगस्त 2009
वाम दलों की रैली

सोमवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में वाम दलों की रैली के कारण यातायात पूरी तरह से ठप्प हो गया. इस रैली में 5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया.

पश्चिम बंगाल में पचास साल पहले हुए खाद्य अधिकार आंदोलन में मारे गए लोगों की याद में इस रैली का आयोजन किया गया था. आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फ़ायरिंग में 80 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. उस समय राज्य में कॉंग्रेस की सरकार थी.

इस रैली का नेतृत्व वाम दलों ने किया जो इस समय सत्ता में हैं.

सोमवार की इस विशाल रैली को राज्य में सत्ताधारी वाम मोर्चे के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है जिसे हाल में काफ़ी चुनावी झटके खाने पड़े हैं.

रैली स्थल के लिए कोलकाता के व्यापारिक इलाक़े के केन्द्र को चुना गया था क्योंकि इसी जगह विपक्षी तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने 21 जुलाई को एक रैली का आयोजन किया था.

उस रैली में भी लाखों लोग आए थे और शहर का ट्रैफ़िक ठप्प हो गया था.

सूखा और खाद्यान्न की कमी

Image caption रैली के माध्यम से वाम मोर्चे ने किया शक्ति प्रदर्शन.

सूखा और खाद्यान्न की कमी बंगाल के इतिहास का हिस्सा रहे हैं. कोई 250 साल पहले जब ब्रिटन ने बंगाल को जीतकर वहां की परंपरागत खेती बाड़ी में परिवर्तन किए तो उसके विनाशकारी परिणाम निकले.

सन 1959 का आंदोलन इसी के विरोध में हुआ था.

सोमवार की रैली में वाम दलों के नेताओं ने इतिहास की उस घटना को याद किया.

विश्लेषकों का कहना है कि वाम दल नई पीढ़ी को यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि कांग्रेस के ज़माने में किस तरह का पुलिस दमन हुआ.

पश्चिम बंगाल के मुख्यममंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य खाद्य आंदोलन के दौरान वामपंथी छात्र संयोजक थे. उन्होने कहा, "विश्वास ही नहीं होता था कि पुलिस इतने लोगों की हत्या कर सकती है. इतने सारे भूखे लोगों की. जिनका कोई दोष नहीं था बस इतना ही कि वो खाना मांगने आए थे".

बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा, "उस समय के कांग्रेस नेतृत्व में संवेदनशीलता का नितांत अभाव था तभी तो वो दो दिन में 80 लोगों की हत्या कर सके. वो बंदूक की गोली और लाठी के बल पर सरकार चलाते थे".

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को एकबार फिर खाद्यान्न की कमी झेलनी पड़ेगी क्योंकि वर्षा की कमी के कारण फसल नष्ट हो गई है और खाद्यान्न के दाम चढ़ते जा रहे हैं.

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