'दसवीं की परीक्षा अनिवार्य नहीं'

  • 31 अगस्त 2009

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को बताया कि केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड ने सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा को वैकल्पिक बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि अब दसवीं बोर्ड की परीक्षा देना विद्यार्थियों के लिए अब अनिवार्य नहीं होगा.

उन्होंने राज्यों के शित्रा मंत्रियों के साथ बैठक के बाद कहा कि केंद्रीय बोर्ड यानी सीबीएसई में अगले साल से ग्रेडिंग प्रणाली लागू की जाएगी.

उनका कहना था, "हम सीबीएसई में दसवीं कक्षा के लिए ग्रेडिंग प्रणाली अगले साल से लागू कर देंगे. ग्रेडिंग प्रणाली के तहत कोई विद्यार्थी अगर बोर्ड की परीक्षा देना नहीं चाहता है तो उसके लिए यह अनिवार्य नहीं होगा. उसका मूल्यांकन ग्रेड के आधार पर होगा."

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बोर्ड में जब ये प्रणाली लागू हो जाए तो राज्य सरकारें भी इसे अपना सकती हैं.

ये बैठक शिक्षा पर केंद्रीय सलाहकार समिति ने बुलाई थी.

इस बैठक में शिक्षा के अधिकार बिल को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों पर चर्चा हुई.

कपिल सिब्बल ने कहा कि ग्रेडिंग प्रणाली पर सभी राज्यों में सहमति है. उन्होंने कहा कि सभी राज्यों ने इसका समर्थन किया है.

लेकिन अभी से स्कूल इस नई प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जिसके तहत वार्षिक परीक्षा की जगह ग्रेड से बच्चों का मूल्यांकन किया जाएगा.

सीबीएसई का कहना है कि बच्चों का निरंतर साल भर मूल्यांकन होगा और बच्चो के पास ये विकल्प होगा कि वो चुनें कि उन्हें 10वीं की परीक्षा देनी है या नहीं.

शिक्षाविदों को इस योजना के कार्यान्वयन को लेकर चिंता है.

इस प्रस्ताव के अलावा कुलपतियों की नियुक्ति की नई प्रक्रिया का प्रस्ताव भी आया.

कपिल सिब्बल ने बताया कि कुलपतियों के चयन के लिए विशेषज्ञों की एक स्वायत्त समिति गठित होगी जो इस पद के लिए नाम सुझाएगी.

अगर सरकार इस नाम को नामंजूर करती है तो मामला फिर से समिति के पास जाएगा, मगर सरकार अपनी तरफ से नियुक्ति में दखलंदाज़ी नहीं कर सकती है.

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