भारत-चीन नियंत्रण रेखा पर बढ़ता तनाव

  • 1 सितंबर 2009
भारत चीन का झंडा
Image caption पिछले महीनों में कई बार चीन ने सीमा का उल्लंघन किया

चीन के सैन्य हेलिकॉप्टरों ने भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में कुछ दिनों पहले भारत की वायुसीमा का उल्लंघन किया था.

भारतीय सेना ने अपने क्षेत्र में चीनी हेलिकॉप्टरों की उड़ान की बात स्वीकार की है और कहा है कि इस मामले को चीनी फ़ौज के साथ हुई फ़्लैग मीटिंग में उठाया गया था.

लेह सेक्टर में भारत-चीन लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (भारत और चीन के बीच वह वास्तविक नियंत्रण रेखा, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है) पर सीमा उल्लंघन की घटना जून महीने में घटी थी, लेकिन इसकी ख़बर सोमवार को आई.

ख़बरों के अनुसार लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर तरेग चोटी के नज़दीक चीनी हेलिकॉप्टर भारत के आकाश में पाँच मिनट तक उड़ता रहा और इन्होंने डिब्बाबंद खाने का सामान भी नीचे गिराया.

भारतीय सेना के प्रमुख दीपक कपूर ने इस घटना को स्वीकार करते हुए कहा, "इस तरह की स्थिति अक्सर दिशा के निर्धारण में ग़लती की वजह से भी हो जाती है, लेकिन इसका अर्थ नहीं है कि मैं इस उल्लंघन की वजह बता रहा हूँ. इस मामले को चीन के साथ होनी वाली मीटिंग में उठाया गया था."

चीन ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

उल्लंघन

ख़बरों के अनुसार चीन की तरफ़ से अगस्त महीन में वास्तविक नियंत्रण रेखा का कम से कम 26 बार उल्लंघन हुआ. जुलाई के महीने में भी चीनी गश्ती फ़ौज की टुकड़ियों ने कई भारतीय सीमा में प्रवेश किया और फ़ौजियों के मिट्टी तेल, पेट्रोल और अन्य सामान उठा ले गईं.

भारतीय सेना का कहना है कि कई स्थानों पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के बारे में दोनों देशों की जगह को लेकर विवाद है. जिसकी वजह से इस तरह के मामले घटते हैं.

लेकिन रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर सिर्फ़ नियंत्रण रेखा पर असमंजस से ये स्थिति पैदा हो रही है तो फिर इस तरह की ग़लती भारत की ओर से क्यों नहीं हो रही है. कुछ ख़बरों में बताया गया है कि चीन की तरफ़ से उल्लंघन में पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

कुछ विश्लेषकों का कहना है चीन भारत से अपने सीमा विवाद में अब अपना सैन्य दबाब बढ़ाना चाहता है.

पिछले साल सिक्कम से भारत-चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की ओर से गोलीबारी की ख़बरें आई थीं. ये गोलीबारी दो दिन चली थी. कुछ महीने पहले चीन की एक अर्ध सरकारी रिसर्च संगठन की वेबसाइट पर एक ऐसा लेख प्रकाशित हुआ था जिसमें विशेषज्ञ ने भारत को 20 से अधिक टुकड़ो में तोड़ने का सुझाव दिया था. विशेषज्ञ ने चीनी सरकार पर ज़ोर दिया था कि वो भारत के भीतर सक्रिय चरमपंथी संगठनों की सहायता करे.

दिलचस्प बात यह है कि इसका स्पष्टिकरण चीन के बजाए भारत के विदेश मंत्रालय को देना पड़ा और ये कहा गया कि ये चीन का सरकारी दृष्टिकोण नहीं है बल्कि एक टीकाकार की अपनी राय है.

चीन और भारत का सीमा विवाद दशकों पुराना है. चीन भारत के सिक्कम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख़ क्षेत्र में कई हज़ार वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर दावा करता रहा है.

दोनों देशों में सीमा विवाद पर अर्से से बातचीत हो रही है लेकिन बातचीत में कोई ख़ास प्रगति नहीं देखी गई है.

दौरे का विरोध

कुछ महीने पहले चीन ने भारत के राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के अरुणाचल प्रदेश के दौरे का विरोध किया था. चीन ने विश्व बैंक की एक सहायता योजना का भी विरोध किया था जो राशि अरुणाचल प्रदेश में ख़र्च होनी थी.

रक्षा विश्लेषक सी राजा मोहन कहते हैं कि दलाई लामा की सक्रियता चीन के लिए लगातार परेशानी का कारण बन रही है और भारत की ओर से उनके समर्थन से रिश्तों में खटास आई है.

हालाँकि सी राजा मोहन कहते हैं, "चीन एक बड़ी आर्थिक ताक़त है और संबंध इस स्तर तक ख़राब नहीं हो सकते की सैन्य टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाए."

सोमवार को सेवानिवृत्त हो गए वायु सेना के प्रमुख सुरीश मेहता ने कुछ दिन पहले भारत को चेतावनी देते हुए कहा था, "चीन आर्थिक तौर पर ताक़तवर होने के साथ-साथ सीमाओं के मामले में भारत पर अपना दबाब डाल रहा है."

उनका ये भी कहना था, "भारत सैन्य मामलों में चीन से बहुत पीछे है और हमारा पूरा ध्यान पाकिस्तान पर रहा है, लेकिन हमें पाकिस्तान के बजाय चीन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है."

कुछ टीकाकार का कहना है कि चीन एशिया में अपना वर्चस्व दिखाना चाहता है जिसके लिए वो भारत पर हमला भी कर सकता है. लेकिन भारत सरकार इस तरह की बातों को नकारती रही है लेकिन बदली हुई स्थिति में भारत एक दीर्घाकालिक रणनीति बनाने में लगा है.

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